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Home Technology 1 घंटे में 4.5 लाख रुपये खर्च कर रात को बनाइए दिन, कमाल की है तकनीक

1 घंटे में 4.5 लाख रुपये खर्च कर रात को बनाइए दिन, कमाल की है तकनीक

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1 घंटे में 4.5 लाख रुपये खर्च कर रात को बनाइए दिन, कमाल की है तकनीक

स्पेस टेक्नोलॉजी में लगातार नये प्रयोग हो रहे हैं और इसी कड़ी में Reflect Orbital नाम के स्टार्टअप ने एक अनोखा आइडिया पेश किया है. कंपनी ऐसी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे रात के समय भी धरती पर सूरज की रोशनी पहुंचाई जा सके. यह सेवा बेहद प्रीमियम है और इसकी कीमत लगभग ₹4.5 लाख प्रति घंटे तय की गई है.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

इस सिस्टम में सैटेलाइट्स पर लगे विशेष मिरर सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट करते हैं. ये मिरर उस रोशनी को धरती पर किसी खास लोकेशन पर फोकस करते हैं. इसमें प्रिसिजन मिरर अलाइनमेंट और एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिससे रोशनी सही जगह पर पहुंच सके.

कहां हो सकता है इस्तेमाल?

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीक रात के समय कंस्ट्रक्शन साइट्स, बड़े इवेंट्स और इमरजेंसी ऑपरेशंस में बेहद उपयोगी हो सकती है. रिफ्लेक्ट ऑर्बाइटल की वेबसाइट कहती है कि इसके अलावा बिजली की कमी वाले इलाकों में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है.

पर्यावरण और चुनौतियां

इस तकनीक से बिजली की खपत कम हो सकती है क्योंकि यह प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करती है. हालांकि, इसका असर इकोसिस्टम और प्राकृतिक दिन-रात के चक्र पर चिंता का विषय है. साथ ही, इसकी ऊंची कीमत, जटिल तकनीक और सरकारी अनुमतियां बड़ी चुनौतियां हैं.

लाइटिंग और एनर्जी सेक्टर में क्रांति

अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह लाइटिंग और एनर्जी सेक्टर में क्रांति ला सकती है. साथ ही, स्पेस-बेस्ड सर्विसेज के नये अवसर भी खुल सकते हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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