[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology पुणे में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, 1.2 करोड़ गंवाने के सदमे से 83 साल के बुजुर्ग की मौत, आप रहें अलर्ट

पुणे में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, 1.2 करोड़ गंवाने के सदमे से 83 साल के बुजुर्ग की मौत, आप रहें अलर्ट

0
पुणे में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, 1.2 करोड़ गंवाने के सदमे से 83 साल के बुजुर्ग की मौत, आप रहें अलर्ट
डिजिटल अरेस्ट स्कैम अलर्ट

Digital Arrest Scam Alert: पुणे से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. एक 83 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति ने लगभग 1.2 करोड़ गंवा दिए, एक धोखाधड़ी में, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. कुछ ही सप्ताह बाद उनकी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. मामले में उनकी पत्नी ने बाद में शिकायत दर्ज कराई है.

कैसे हुआ फ्रॉड?

पुणे में इस बुजुर्ग को अगस्त में एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को डालने के लिए कहा कि वह Kolaba Police Station का अधिकारी है. उसने दावा किया कि बुजुर्ग का नाम एक गंभीर अपराध, उदाहरण के लिए धन शोधन मामले से जुड़ा हुआ है. अगली वीडियो कॉल में आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी और आईपीएस अधिकारी बता दिया. धोखाधड़ी करने वालों ने घंटों वीडियो कॉल पर उन्हें रखा, बैंक खाते की पुष्टि करवाने का बहाना बनाया और 16 अगस्त से 17 सितंबर के बीच लगभग ₹1.19 करोड़ को हजारों रूप में विभिन्न खातों में स्थानांतरित करवाया. इसके बाद उन्होंने बताया कि यह राशि बाद में वापस कर दी जाएगी.

अंदर तक हिला देते हैं नतीजे

कुछ सप्ताह बाद, इस बुजुर्ग व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई. स्पष्ट करना होगा कि धोखाधड़ी और दिल का दौरा, उन्हें सीधे जोड़ना मुश्किल है, लेकिन मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान ने स्थिति बेहद जटिल बना दी. उनकी पत्नी और बेटी ने तब जाकर साइबर पुलिस थाने में शिकायत की है और जांच जारी है.

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक वास्तविक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग किया जाने वाला धोखाधड़ी का तरीका है, जहां किसी व्यक्ति को घोषित किया जाता है कि वे गिरफ्तार हैं, या उनके बैंक खाते फ्रीज होने वाले हैं, या उन्हें ऑनलाइन गिरफ्तारी के तहत रखा गया है.

धोखेबाज इन तरीकों से काम करते हैं:

  • फोन या वीडियो कॉल के जरिये खुद को पुलिस / सीबीआई / आरबीआई आदि अधिकारी बताते हैं
  • वीडियो कॉल के दौरान पीड़ित को कस्टडी में बताये रखते हैं, संबंधियों से बात नहीं करने देते, घंटों कॉल पर रखते हैं
  • डर, धमकी और समय-सीमा का उपयोग करके तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं.

कैसे बचें- सावधानी के उपाय

  • पहचान की पुष्टि करें: यदि कोई कॉल कर रहा है और दावा कर रहा है कि आप गिरफ्तारी के दायरे में हैं, तो अलग से उस एजेंसी को आधिकारिक नंबर से कॉल करें
  • पैसे तुरंत ना भेजें: कोई भी अधिकारी फोन पर या वीडियो कॉल के माध्यम से आपको तुरंत पैसा ट्रांसफर करने नहीं कहेगा
  • ओटीपी, पासवर्ड साझा न करें: बैंक लेन-देह में ओटीपी या पासवर्ड किसी को नहीं बताना चाहिए
  • कॉल काटें, शांत रहें: डर के प्रभाव में न आएं; कॉल काटें, परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें
  • घंटे-घंटे वॉयस कॉल और वीडियो कॉल में न रहें: इससे खतरा बढ़ सकता है
  • साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन: किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या टोल-फ्री नंबर 1930 पर शिकायत करें.

शिकायत कहां करें?

  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov.in
  • हेल्पलाइन संख्या: 1930
  • स्थानीय साइबर पुलिस थाने में जाकर एफआईआर दर्ज कराएं.

इस घटना ने इस बात पर जोर दिया है कि साइबर ठगी कितनी खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों के लिए. डिजिटल अरेस्ट का नाम सुनकर डरना आसान है, लेकिन सच यह है कि यह एक धोखाधड़ी का नाम है, न कि कोई कानूनी प्रक्रिया. जागरूक रहें, शांत रहें और किसी भी दबाव में फंसे बिना सही कदम उठाएं.

Driving Licence से मोबाइल नंबर लिंक नहीं किया तो होगी दिक्कत, जानें इसे जोड़ने के 5 आसान स्टेप्स

Tech Tips: फोन पर आ रहे कॉल्स और मैसेज असली हैं या फर्जी? जानिए कैसे करें पहचान और रिपोर्ट

Previous article अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष के पास की पूजा-अर्चना
Next article Mamta Kulkarni: “दाऊद इब्राहिम आतंकवादी नहीं”, ममता कुलकर्णी ने अंडरवर्ल्ड डॉन का किया बचाव, बोलीं- बम धमाके में शामिल नहीं रहा
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel