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Home Technology पुराना स्मार्टफोन बना खतरा, हैकर्स ऐसे आपको लगा सकते हैं चूना

पुराना स्मार्टफोन बना खतरा, हैकर्स ऐसे आपको लगा सकते हैं चूना

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पुराना स्मार्टफोन बना खतरा, हैकर्स ऐसे आपको लगा सकते हैं चूना
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आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग डिवाइस नहीं, बल्कि हमारी पूरी जिंदगी का कंट्रोल सेंटर बन चुका है. बैंकिंग, सोशल मीडिया, फोटो, वीडियो- सब कुछ इसी में कैद है. लेकिन अगर आपका फोन “Expired” हो चुका है, तो यही डिवाइस आपके लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकता है. साइबर एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि पुराने और असुरक्षित स्मार्टफोन हैकर्स के लिए आसान टारगेट बनते जा रहे हैं.

क्या होता है ‘Expired Smartphone’ और क्यों है खतरनाक?

स्मार्टफोन के एक्सपायर होने का मतलब यह नहीं कि वह चालू नहीं होगा, बल्कि इसका मतलब है कि कंपनी ने उसे सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट देना बंद कर दिया है. जैसे ही अपडेट बंद होते हैं, फोन का सिक्योरिटी सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है.

यही कमजोरी साइबर अपराधियों के लिए एंट्री गेट बन जाती है. बिना अपडेट वाले फोन में मौजूद खामियों को हैकर्स आसानी से एक्सप्लॉइट कर सकते हैं.

कैसे हैकर्स बना लेते हैं फोन पर पूरा कंट्रोल?

एक बार अगर फोन में सेंध लग गई, तो हैकर्स के पास आपके डिवाइस का पूरा ऐक्सेस आ सकता है. वे आपके सोशल मीडिया अकाउंट्स, कैमरा, माइक्रोफोन और यहां तक कि बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना सकते हैं.

सबसे खतरनाक बात यह है कि हैकर्स ओटीपी पढ़ सकते हैं, जिससे आपके बैंक अकाउंट से पैसे निकालना उनके लिए आसान हो जाता है. कई मामलों में यूजर्स को पता भी नहीं चलता और अकाउंट खाली हो जाता है.

बिना अपडेट वाला फोन बना हैकर्स का हथियार

सिर्फ पैसे ही नहीं, आपकी प्राइवेसी भी दांव पर लग जाती है. हैकर्स कैमरा और माइक्रोफोन को रिमोटली ऐक्सेस कर सकते हैं. इसका मतलब है कि वे आपकी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं- आप कहां हैं, किससे बात कर रहे हैं, और क्या कर रहे हैं.

यह स्थिति न सिर्फ असहज है, बल्कि ब्लैकमेलिंग और डेटा चोरी जैसे गंभीर अपराधों का कारण भी बन सकती है.

किन यूजर्स को ज्यादा खतरा है?

जिन लोगों के पास 3-4 साल पुराने स्मार्टफोन हैं और जिन्हें लंबे समय से कोई अपडेट नहीं मिला है, वे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. खासकर बजट और मिड-रेंज डिवाइस, जिनमें कंपनियां जल्दी अपडेट देना बंद कर देती हैं, ज्यादा संवेदनशील होते हैं.

अगर आपके फोन में लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच नहीं है, तो यह संकेत है कि आपका डिवाइस अब सुरक्षित नहीं रहा.

कैसे बचें इस साइबर खतरे से?

सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि आप समय-समय पर अपने फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट चेक करते रहें. अगर आपका फोन अपडेट नहीं ले रहा, तो उसे बदलने पर विचार करें.

साथ ही, केवल भरोसेमंद ऐप्स ही इंस्टॉल करें और संदिग्ध लिंक या फाइल्स से दूर रहें. मोबाइल सिक्योरिटी अब सिर्फ ऑप्शन नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है.

यह भी पढ़ें: आपकी कॉल रिकॉर्ड हो रही है या नहीं, ऐसे करें पहचान

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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