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NoVoice मालवेयर: 23 लाख बार डाउनलोड हुए ऐप्स में मिला खतरनाक वायरस

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NoVoice मालवेयर: 23 लाख बार डाउनलोड हुए ऐप्स में मिला खतरनाक वायरस
NoVoice malware news

साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee ने एक नये एंड्रॉयड मालवेयर की खोज की है, जिसका नाम NoVoice है. यह मालवेयर बेहद खतरनाक है क्योंकि यह फोन को फैक्ट्री रीसेट करने के बाद भी पूरी तरह से नहीं हटता. रिपोर्ट के मुताबिक, यह 50 से ज्यादा ऐप्स में छिपा हुआ मिला है जिन्हें गूगल प्ले स्टोर पर अब तक 23 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है.

कैसे काम करता है NoVoice मालवेयर

NoVoice सामान्य दिखने वाले ऐप्स जैसे सिस्टम क्लीनर, गेम्स और फोटो गैलरी में छिपकर आता है. इंस्टॉल होने के बाद यह फोन की पुरानी कमजोरियों का फायदा उठाकर रूट ऐक्सेस हासिल कर लेता है. इसके बाद यह सिस्टम के गहरे हिस्से में खुद को छिपा लेता है, जिससे सामान्य फैक्ट्री रीसेट भी इसे हटाने में असफल रहता है. इसे हटाने का एकमात्र तरीका है फोन का पूरा फर्मवेयर दोबारा इंस्टॉल करना.

किन यूजर्स पर ज्यादा असर

यह मालवेयर मुख्य रूप से पुराने बजट एंड्रॉयड स्मार्टफोन को निशाना बनाता है, खासकर वे डिवाइस जिन्हें मई 2021 के बाद से सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिला. अफ्रीका में सबसे ज्यादा प्रभावित यूजर्स पाये गए हैं, लेकिन भारत, अमेरिका और यूरोप के कुछ यूजर्स भी इसकी चपेट में आये हैं.

कैसे बचें इस खतरे से

  • हमेशा लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट इंस्टॉल करें
  • केवल Google Play Store से ही ऐप्स डाउनलोड करें और रिव्यू जरूर पढ़ें
  • अनजान ऐप्स से बचें और जरूरत पड़ने पर विश्वसनीय एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल करें
  • अगर आपका फोन पुराना है और अपडेट नहीं मिल रहा, तो सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर फर्मवेयर रीफ्लैश करवाएं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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