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Home Technology LinkedIn पोस्ट पर ‘Like’ क्या किया, टूट गया ऑफिस का नियम? Reddit पोस्ट से छिड़ी बहस

LinkedIn पोस्ट पर ‘Like’ क्या किया, टूट गया ऑफिस का नियम? Reddit पोस्ट से छिड़ी बहस

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LinkedIn पोस्ट पर ‘Like’ क्या किया, टूट गया ऑफिस का नियम? Reddit पोस्ट से छिड़ी बहस
क्या LinkedIn पोस्ट को लाइक करने से ऑफिस के नियम टूटे? / सांकेतिक तस्वीर चैटजीपीटी एआई से

भारतीय कॉरपोरेट कल्चर में कर्मचारियों की सोशल मीडिया एक्टिविटी पर नियंत्रण को लेकर नयी बहस शुरू हो गई है. Reddit पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया है कि एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को LinkedIn पर दूसरे ब्रांड्स की पोस्ट लाइक करने और ‘Open to Work’ बैज लगाने से रोक दिया है. यह निर्देश ऑफिस टाइम से बाहर की पर्सनल एक्टिविटी पर भी लागू बताए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है. मामला अब वर्कप्लेस प्राइवेसी और प्रोफेशनल फ्रीडम पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है.

Employer policing LinkedIn activity -no likes, no comments, no “Open to Work”. Normal?
byu/Agreeable-Cook5296 inIndianWorkplace

“दूसरी कंपनी की LinkedIn पोस्ट पर इंटरैक्शन न करें”

Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर एक अनाम यूजर ने लिखा कि उनकी कंपनी ने साफ निर्देश दिए हैं- कर्मचारी किसी भी दूसरी कंपनी की LinkedIn पोस्ट पर इंटरैक्शन न करें. कंपनी का तर्क है कि इससे “प्रोफेशनलिज्म” और “कंपनी इमेज” प्रभावित होती है. हालांकि, कंपनी का नाम सामने नहीं आया है और इन दावों की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है.

“ऑफिस के बाहर की एक्टिविटी को कंट्रोल करना गलत”

पोस्ट वायरल होते ही कई यूजर्स ने इसे कर्मचारियों की पर्सनल फ्रीडम में दखल बताया. उनका कहना है कि LinkedIn कोई इंटरनल टूल नहीं है और ऑफिस के बाहर की एक्टिविटी को कंट्रोल करना गलत है. कई लोगों ने इसे माइक्रो मैनेजमेंट का उदाहरण कहा, जो भारतीय कॉरपोरेट कल्चर में पहले से ही चिंता का विषय है.

कितनी ‘पर्सनल’ मानी जाए सोशल मीडिया प्रोफाइल?

LinkedIn जैसे प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लैटफॉर्म पर कंपनियों का दबाव नया नहीं है. कुछ कंपनियां कर्मचारियों को ‘Open to Work’ बैज लगाने से रोकती हैं, तो कुछ उन्हें हर महीने कंपनी से जुड़ी पोस्ट डालने के लिए मजबूर करती हैं. सवाल यह है कि सोशल मीडिया प्रोफाइल कितनी ‘पर्सनल’ मानी जाए और कंपनियों को किस हद तक दखल का अधिकार हो. यह मुद्दा डेटा प्राइवेसी और डिजिटल वर्कप्लेस एथिक्स से सीधे जुड़ता है.

Height of targeting by boss because I opened myself for work on LinkedIn
byu/cookdooku inIndianWorkplace

कॉरपोरेट पॉलिसी का हिस्सा

वर्कप्लेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों का ऐसा रवैया कर्मचारियों में असुरक्षा और अविश्वास पैदा करता है. ट्रेंड यह भी दिखाता है कि LinkedIn पर एक्टिविटी अब सिर्फ नेटवर्किंग नहीं, बल्कि कॉरपोरेट पॉलिसी का हिस्सा बनती जा रही है. कई कर्मचारी दबाव में कंपनी ब्रांडिंग वाले प्रोफाइल बैनर तक इस्तेमाल करने को मजबूर हैं.

सोशल मीडिया पर पहचान की बात

यह विवाद एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि डिजिटल युग में कर्मचारियों की सोशल मीडिया पहचान कहां तक निजी है. आने वाले समय में कंपनियों और कर्मचारियों के बीच इस संतुलन को लेकर और बहस तेज हो सकती है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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