[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को किसने कहा भेड़ की खाल में छिपा भेड़िया?

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को किसने कहा भेड़ की खाल में छिपा भेड़िया?

0
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को किसने कहा भेड़ की खाल में छिपा भेड़िया?
क्या भारत के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक?

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस लाने की तैयारी कर रही है. इस बीच शोध संस्थान ‘कूटनीति फाउंडेशन’ ने इस प्रोजेक्ट को लेकर राष्ट्रीय हितों में बाधक बनने की संभावना जतायी है. इसकी वजह स्टारलिंक के अमेरिकी खुफिया और सैन्य एजेंसियों के साथ गहरे संबंध हैं. स्टारलिंक को भेड़ की खाल में छिपा भेड़िया करार देते हुए फाउंडेशन ने कहा कि स्टारलिंक दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी है. इसकी सबसे बड़ी ग्राहक तथा प्रचारक अमेरिकी सरकार की खुफिया तथा सैन्य एजेंसियां हैं.

सैटेलाइट्स का कंट्रोल देश के बाहर होने से खड़े होंगे कई सवाल

मौजूदा मोबाइल फोन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां, वॉयस और इंटरनेट सेवाएं देने करने के लिए टेलीकॉम टावर का इस्तेमाल करती हैं. सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन या सैटकॉम में यह सेवा मुहैया कराने के लिए सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया जाएगा. इन सैटेलाइट्स का कंट्रोल देश के बाहर होने पर कई सवाल खड़े किये जा रहे हैं. ‘कूटनीति’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्टारलिंक सैटेलाइट्स दुनियाभर में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स का एक नया ट्रेंड है, जो देशों और प्राकृतिक सीमाओं से परे है. दुनिया के हर नागरिक तक इसकी सीधी पहुंच होगी और इसमें यूजर अमेरिकी कंपनी के बीच कामकाज के संचालन का कोई ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है.

सरकार ने कहा- नियम पालन करेंगे, तभी देंगे लाइसेंस

संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा था कि स्टारलिंक का अभी सुरक्षा मानदंडों का पालन करना बाकी है. उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए उसे लाइसेंस भारत में सेवाओं के लिए सभी मानदंडों को पूरा करने के बाद जारी किया जाएगा. मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स एक अमेरिकी खुफिया एजेंसी के साथ एक वर्गीकृत अनुबंध के तहत सैकड़ों जासूसी उपग्रहों का एक नेटवर्क बना रही है. यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक उपग्रह संपर्क के इस्तेमाल को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन और कंपनी के बीच विवाद खड़ा हो गया था.

वैश्विक राजनीति में मस्क की बढ़ती दखल

अरबपति मस्क ने हाल ही में संपन्न अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में बाइडन की पार्टी की कमला हैरिस के सामने डोनाल्ड ट्रंप का खुलकर समर्थन किया था. मस्क ने पिछले साल कहा था कि उन्होंने रूसी बेड़े पर हमले में सहायता के लिए अपने स्टारलिंक उपग्रह नेटवर्क को सक्रिय करने के यूक्रेन के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था.

अमेरिकी एजेंसियों के लिए काम करती हैं मस्क की कंपनियां

‘कूटनीति’ ने मस्क की कंपनियों और अमेरिकी एजेंसियों के बीच कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स की खबरों का हवाला देते हुए कहा है, ये अमेरिका के खुफिया सैन्य औद्योगिक परिसर के हिस्से के रूप में काम करने वाले स्टारलिंक के कॉन्ट्रैक्ट हैं. इनके तहत बहुत सारे सीक्रेट डील्स और एग्रीमेंट्स हैं, जिनका खुलासा नहीं किया गया है. इसमें कहा गया, इसके अलावा यह सर्वविदित है कि स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क विभिन्न निजी खुफिया कंपनियों के करीब हैं और अमेरिकी राजनीतिक में काफी सक्रिय व्यक्तित्व हैं, जो पलान्टिर टेक्नोलॉजीज यूएसए तथा ट्रंप चुनाव 2024 तक सीमित नहीं है.

कुछ देशों के नियम-कायदों का मजाक उड़ाती हैं मस्क की कंपनियां

रिपोर्ट में कहा गया है, एलन मस्क की अगुवाई वाली कंपनियां ब्राजील, यूक्रेन और ईरान जैसे देशों के नियमों और नीतियों का अनादर करती हैं. पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया, स्टारलिंक बहुत साफ तौर पर जियो-पॉलिटिकल कंट्रोल की एक टेक्नोलॉजी है, जिसे खुफिया और रक्षा बलों का अंतरिक्ष में प्रभुत्व जमाने और उसके जरिये जमीन पर नियंत्रण हासिल करने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है.

5000 रुपये हर घंटे कमाने का मौका दे रहे Elon Musk, हिंदी में xAI के लिए करना है काम

एलन मस्क का अजूबा फोन : सूरज की रोशनी से होगा चार्ज, चंदा मामा पर भी चलेगा इंटरनेट!

Previous article Happy Children’s Day Wishes: बाल दिवस को बनाएं और भी खास, इन अनोखी बधाइयों के साथ
Next article अपराधियों ने ग्रुप लोन कर्मी को मारी गोली, भागलपुर जाने के क्रम में हुई मौत
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel