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Home Technology वॉशिंग मशीन का वो हिस्सा जो बना रहा आपके कपड़े को बदबूदार, जानें उसे साफ करने के असरदार तरीका

वॉशिंग मशीन का वो हिस्सा जो बना रहा आपके कपड़े को बदबूदार, जानें उसे साफ करने के असरदार तरीका

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वॉशिंग मशीन का वो हिस्सा जो बना रहा आपके कपड़े को बदबूदार, जानें उसे साफ करने के असरदार तरीका
washing machine rubber door seal

Washing Machine: वॉशिंग मशीन आज के समय में हर घर की जरूरत बन चुका है. इसके होने से कपड़े जल्दी धुल जाते हैं और सुख भी जाते हैं, यानी यह समय और मेहनत दोनों बचाता है. अब जैसे अभी घरों में दिवाली की साफ-सफाई चल रही है, ऐसे में ढेर सारे गंदे कपड़े एक साथ धोने पड़ते हैं. यही काम वॉशिंग मशीन झटपट कर देता है.

लेकिन क्या आपने कभी नोटिस किया है कि कपड़े वॉशिंग मशीन (Washing Machine) में धुलने के बाद भी उनमें से अजीब सी सीलन या बदबू रह जाती है? अगर हां, तो इसका एक सबसे बड़ा कारण आपकी मशीन के दरवाजे पर लगी रबर सील या गैसकेट हो सकती है. सुन कर आप भी हैरान हो गए हैं न, लेकिन यह सच है. आइए आपको बताते हैं कैसे… 

गैसकेट बना रही आपके कपड़े को बदबूदार

आप इसे सील, रबर सील, गैस्केट या डोर बूट कुछ कुछ भी कह सकते हैं. बात उसी रबर की लचीली पट्टी की हो रही है जो टॉप-लोडिंग वॉशिंग मशीन (Washing Machine) के ढक्कन या फ्रंट-लोडिंग मशीन के दरवाजे के चारों ओर लगी होती है. इसका काम पानी को मशीन के अंदर रोकना होता है ताकि वॉशिंग के दौरान लीक न हो.

होता क्या है कि जब मशीन चल रही होती है, तो पानी, डिटर्जेंट का झाग और कपड़ों की गंदगी इसी सील के कोनों और तहों में फंस जाते हैं. अगर इसे ठीक से साफ कर के सुखाया न जाए तो वहां फफूंदी और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. मशीन (Washing Machine) के अंदर बनने वाली यह नमी और गर्मी इनकी बढ़त के लिए बिल्कुल सही जगह बन जाता है. धीरे-धीरे यही बैक्टीरिया आपके कपड़ों में घुस जाते हैं, जिससे धुले हुए कपड़े भी बदबूदार और गीले जैसी महक देते हैं.

वॉशिंग मशीन की रबर सील कैसे साफ करें?

  • एक छोटे कटोरे में गुनगुना पानी और सिरका (डिस्टिल्ड वाइट विनेगर) बराबर मात्रा में मिलाएं.
  • एक माइक्रोफाइबर कपड़ा या स्पंज को उस घोल में डुबोएं.
  • अब उसी गीले कपड़े या स्पंज से रबर सील के किनारों, जोड़, मोड़ों और अंदर-बाहर की सतहों को अच्छी तरह पोंछें. सील के फोल्ड्स को हल्के से खींचें ताकि अंदर जमी गंदगी भी निकल जाए.
  • जहां कपड़ा नहीं पहुंच पा रहा, वहां पुराना टूथब्रश या छोटा ब्रश (नायलॉन ब्रिसल वाला) इस्तेमाल करें और सिरके वाले घोल से साफ करें.
  • आखिर में एक सूखे माइक्रोफाइबर तौलिए से पूरी सील को पोंछ लें और उसे सूखने दें ताकि उसमें नमी न रहे.

वॉशिंग मशीन गैसकेट से जुड़े FAQs

वॉशिंग मशीन में गैस्केट क्या है?

वॉशिंग मशीन में गैसकेट दरअसल रबर की एक सील होती है जो मशीन के दरवाजे के चारों ओर लगी होती है.

वॉशिंग मशीन में लगे गैस्केट का काम क्या है?

गैस्केट का काम होता है वॉशिंग मशीन चलने के दौरान पानी को ड्रम के अंदर ही रोककर रखना ताकि कहीं लीक न हो.

गैस्‍केट कितने समय तक चलता है?

गैस्‍केट की उम्र तय नहीं होती, ये कभी 5 साल तो कभी 20 साल तक भी बढ़िया काम कर सकता है। बस ध्यान रहे इसे समय-समय साफ करते रहें.

यह भी पढ़ें: कपड़े धोने पर भी नहीं हो रहे साफ? ऐसे करें वॉशिंग मशीन की अंदरूनी सफाई, सालों तक चलेगी नयी जैसी

यह भी पढ़ें: कपड़े धोते समय वॉशिंग मशीन में लोग क्यों डाल रहे एल्युमिनियम फॉइल? फायदे जानकर आप भी करेंगे ट्राई

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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