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Home Technology Apple Product Verification: आपका नया iPhone, iPad, AirPods और Watch कहीं नकली तो नहीं? ऐसे लगाएं पता

Apple Product Verification: आपका नया iPhone, iPad, AirPods और Watch कहीं नकली तो नहीं? ऐसे लगाएं पता

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Apple Product Verification: आपका नया iPhone, iPad, AirPods और Watch कहीं नकली तो नहीं? ऐसे लगाएं पता
Apple Product Verification

Apple Product Verification: कई लोग चाहते हैं कि उनके भी हाथों में Apple का प्रोडक्ट्स हो. क्योंकि ये काफी प्रीमियम और शानदार होते हैं. लेकिन ऑनलाइन मार्केटप्लेस या किसी अनऑफिशियल सेलर से Apple का प्रोडक्ट खरीदना कभी-कभी रिस्की हो सकता है. आजकल नकली डिवाइस इतने असली जैसे दिखने लगे हैं कि उनकी पैकेजिंग, डिजाइन और यहां तक कि सीरियल नंबर तक कॉपी कर लिए जाते हैं.

लेकिन इसके बावजूद Apple प्रोडक्ट की असलियत जांचने के कुछ भरोसेमंद तरीके आज भी मौजूद हैं. आज हम आपको ऐसे 5 जरूरी चेक बताने जा रहे हैं, जिनसे आप यह कंफर्म कर सकते हैं कि आपका iPhone, iPad, AirPods, Apple Watch या कोई एक्सेसरी असली है या नहीं.

सबसे पहले सीरियल नंबर चेक करें

किसी भी Apple प्रोडक्ट की पहचान करने का सबसे आसान तरीका उसका सीरियल नंबर होता है. आप यह नंबर डिवाइस में Settings > General > About में जाकर देख सकते हैं या फिर प्रोडक्ट के बॉक्स पर भी आपको ये मिल जाता है. इस सीरियल नंबर को Apple की ऑफिशियल कवरेज वेबसाइट पर डालकर चेक करें. अगर प्रोडक्ट असली होगा तो वहां सही मॉडल का नाम, साथ ही वारंटी और खरीद से जुड़ी सारी डिटेल्स दिखाई देगी.

iPhone और iPad का सॉफ्टवेयर चेक करें

नकली iPhone और iPad की पहचान करने में सबसे बड़ा संकेत उसका सॉफ्टवेयर होता है. सबसे पहले App Store खोलें और YouTube या WhatsApp जैसे किसी पॉपुलर ऐप को सर्च करें. अगर डिवाइस आपको Google Play पर ले जाए या कोई वेब-बेस्ड स्टोर खुल जाए, तो समझ लीजिए फोन असली नहीं है. असली iPhone और iPad में सिर्फ Apple का App Store ही सपोर्ट करता है.

इसके अलावा डिवाइस को Mac या Windows PC से कनेक्ट करके देखें. अगर Finder या iTunes उसे पहचान नहीं पाता या “Trust this device” का ऑप्शन नहीं आता, तो यह नकली डिवाइस होने का इशारा हो सकता है.

पेयरिंग और Find My से AirPods की असलियत चेक करें

AirPods, Apple के सबसे ज्यादा नकली बनाए जाने वाले प्रोडक्ट्स में से एक हैं. असली AirPods को अगर किसी अनलॉक iPhone के पास केस खोलकर लाया जाए, तो स्क्रीन पर अपने आप एक स्मूद सा पॉप-अप दिखता है, जिसमें बैटरी लेवल भी नजर आता है. वहीं नकली AirPods में अक्सर आपको मैन्युअली Bluetooth से कनेक्ट करना पड़ता है.

इसके अलावा, ओरिजिनल AirPods को Find My ऐप में आसानी से कनेक्ट किया जा सकता है. अगर आपके AirPods वहां डिवाइस या आइटम के तौर पर नहीं दिखते, तो यह नकली होने का बड़ा संकेत हो सकता है. असली AirPods की एक और पहचान यह है कि हर ईयरबड पर अलग-अलग सीरियल नंबर छपा होता है.

चार्जर और केबल को ध्यान से चेक करें

नकली चार्जर और केबल सिर्फ सही से काम नहीं करते, बल्कि ये खतरनाक भी हो सकते हैं. असली Apple केबल पर कनेक्टर के पास “Designed by Apple in California” लिखा होता है, साथ ही जहां इसे असेंबल किया गया है उसकी डिटेल और 12 अंकों का सीरियल नंबर भी दिया होता है.

Apple के Lightning केबल के कॉन्टैक्ट एकदम स्मूथ, गोल किनारों वाले और एक ही पीस के होते हैं. अगर कॉन्टैक्ट खुरदरे, टेढ़े-मेढ़े या कई हिस्सों में जुड़े हुए दिखें, तो समझ लें कि केबल नकली हो सकती है. थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट लेते समय हमेशा MFi सर्टिफिकेशन जरूर चेक करें.

Apple Watch की पेयरिंग और डिस्प्ले पहचानें

असली Apple Watch सिर्फ iPhone की official Watch app से ही पेयर होती है. अगर घड़ी Bluetooth की नॉर्मल सेटिंग्स से कनेक्ट होने को कहे या किसी थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए चलाने को बोले, तो समझ जाइए कि वह नकली है. डिस्प्ले से भी फर्क साफ नजर आता है. Original Apple Watch में चारों तरफ पतले और बराबर बेजेल होते हैं, जबकि नकली मॉडल में अक्सर स्क्रीन के नीचे की तरफ मोटी काली बॉर्डर दिखाई देती है.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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