[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology EXPLAINER: पिनकोड से कितना अलग है इंडिया पोस्ट का नया एड्रेसिंग सिस्टम डिजीपिन?

EXPLAINER: पिनकोड से कितना अलग है इंडिया पोस्ट का नया एड्रेसिंग सिस्टम डिजीपिन?

0
EXPLAINER: पिनकोड से कितना अलग है इंडिया पोस्ट का नया एड्रेसिंग सिस्टम डिजीपिन?
New Addressing System- DIGIPIN

DIGIPIN: जब भी हम अपना पता कहीं लिखते हैं या किसी को बताते है तो अंत में पिन कोड जोड़ते हैं. यह पिन कोड एक 6 अंकों की डिजिट होती है जिसे भारतीय डाक विभाग द्वारा किसी विशेष क्षेत्र की पहचान के लिए जारी किया जाता है. भारत में वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे छह अंकों वाला पिन कोड सिस्टम 15 अगस्त 1972 से लागू है. यह सिस्टम उस दौर के लिए बनाई गई थी जब देश में डिजिटल सेवाएं और लोगों की गतिशीलता सीमित थी. लेकिन जैसे-जैसे ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी और टेलीमेडिसिन जैसी ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार हुआ, यह पुराना सिस्टम अपनी कई खामियों के साथ सामने आया.

इसी समस्या को हल करने के लिए भारतीय डाक विभाग ने एक नया डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम शुरू किया है, जिसका नाम है डिजिपिन (DIGIPIN) यानी डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर. इसका उद्देश्य यह है कि देशभर में किसी भी जगह का एकदम सटीक और डिजिटल पता आसानी से उपलब्ध हो सके. आइए विस्तार से जानते हैं कि यह नया सिस्टम क्या है और कैसे काम करता है, साथ ही जानेंगे आप अपने डिजिपिन का पता कैसे लगा सकते हैं.

क्या है DIGIPIN?

Digipin एक एडवांस्ड डिजिटल एड्रेस सिस्टम है जिसे भारतीय डाक विभाग ने IIT हैदराबाद और ISRO के साथ मिल कर बनाया है. इसका उद्देश्य देश के हर कोने को एक सटीक डिजिटल पहचान देना है. इस तकनीक के तहत पूरे भारत को 4 मीटर × 4 मीटर के छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है, और हर हिस्से को एक विशेष 10-अक्षरों वाला यूनिक कोड दिया गया है जिसे ‘डिजिपिन’ कहा जाता है.

यह कोड किसी स्थान के अक्षांश (latitude) और देशांश (longitude) पर आधारित होता है. इसकी मदद से कूरियर और पार्सल डिलीवरी के अलावा इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है. आपातकालीन स्थितियों में, आप पुलिस, एम्बुलेंस या अग्निशमन सेवाओं को कॉल करने के लिए अपना डिजीपिन दे सकते हैं.

Pincode से कैसे अलग है DIGIPIN?

Digipin और पिनकोड दोनों ही एड्रेस पहचानने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन इनका काम करने का तरीका पूरी तरह से अलग है. ट्रेडिशनल पिन कोड बड़े इलाके की पहचान के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि डिजीपिन एक डिजिटल लोकेशन सिस्टम है जो पूरे भारत में से किसी भी जगह की बिलकुल सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करता है. पिनकोड जिस तरह से 6 अंकों का होता है, उसी तरह से डिजिपिन 10 अक्षरों का एक यूनिक डिजिटल कोड होता है. इस सिस्टम में पूरे देश को 4×4 मीटर के ग्रिड में बांटा जाता है और इसके बाग हर हिस्से को 10 अक्षरों वाला यह यूनिक कोड दिया जाता है.

क्या DIGIPIN के आने से खत्म हो जाएगा पुराना Pincode सिस्टम?  

DIGIPIN एक पारंपरिक PIN Code का अपग्रेडेड डिजिटल वर्जन है. इसे पूरी तरह रिप्लेस करने के बजाय यह साथ में काम करेगा ताकि एड्रेसिंग सिस्टम ज्यादा स्मार्ट और लोकेशन-सटीक बन सके. आपका पुराना पता वैसे का वैसे ही रहेगा बस DIGIPIN के जरिए डिजिटल लोकेशन भी इससे जुड़ जाएगी. इसकी मदद से पते की जो पहचान और वेरिफिकेशन है वो पहले से ज्यादा फास्ट, सुरक्षित और आसान हो जाएगी.

कैसे पता करें अपना DIGIPIN?

आपको अपना डिजीपिन बनाने के लिए https://dac.indiapost.gov.in/mydigipin/home साइट पर जाना होगा. इस साइट पर आ जाने के बाद आपको अपने डिवाइस को लोकेशन एक्सेस देना होगा ताकि आपकी सटीक स्थिति के आधार पर डिजीपिन बनाया जा सके. एक बार जब आप लोकेशन एक्सेस की अनुमति दे देंगे तो उसके बाद सिस्टम आपकी जगह के हिसाब से एक 10-अक्षरों का यूनिक कोड आपको दे देगा. इस कोड का इस्तेमाल कर आप आपातकालीन सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, कूरियर डिलीवरी और यहां तक कि राइडशेयर बुकिंग भी कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: IRCTC अकाउंट का पासवर्ड भूल गए? सफर न रुके उससे पहले जान लें तरीका, मिनटों में हो जाएगा काम

यह भी पढ़ें: किन लोगों का बन सकता है आयुष्मान कार्ड? पात्रता चेक करने के बाद ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई

Previous article झारखंड में बारिश से सरायकेला-खरसावां की 5 नदियां उफान पर, संजय नदी का पुल डूबा, देखें PHOTOS
Next article Bihar Flood Alert: भोजपुर के जवईनिया गांव में गंगा ने मचाई तबाही, नदी में समाया 150 से अधिक घर
Avatar Of Ankit Anand
अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel