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Home Technology दादाजी के पुराने रोटरी फोन को बना दिया AI असिस्टेंट, खर्च सिर्फ 2000 रुपये

दादाजी के पुराने रोटरी फोन को बना दिया AI असिस्टेंट, खर्च सिर्फ 2000 रुपये

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दादाजी के पुराने रोटरी फोन को बना दिया AI असिस्टेंट, खर्च सिर्फ 2000 रुपये
AI असिस्टेंट की तस्वीर (Photo: X)

AI Assistant : बेंगलुरु में एक टेक के शौकीन ने अपने दादाजी के पुराने रोटरी टेलीफोन (पुराने समय का टेलीफोन) को एक काम करने वाले AI असिस्टेंट में बदल दिया है. इस कमाल के बारे में उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर बताया. पंकज नाम का यह शख्स बेंगलुरु में डेवलपर है. वह अक्सर X पर अपने AI प्रोजेक्ट्स के बारे में यूजर्स को जानकारी देते हैं. उन्होंने मॉडिफाइड डिवाइस की तस्वीरें और एक डेमोंस्ट्रेशन वीडियो पोस्ट किया. इसमें बताया कि उन्होंने रास्पबेरी पाई (इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट में काम आता है) और दूसरे सस्ते पार्ट्स का इस्तेमाल करके असिस्टेंट बनाया है.

पंकज ने एक पुराने रोटरी फोन को दोबारा इस्तेमाल करने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि वह बस हैंडसेट उठाकर “हे किरी” बोलकर असिस्टेंट को एक्टिवेट कर सकते हैं. इसके बाद फिर कैब बुक करने, मीटिंग शेड्यूल करने, खाना ऑर्डर करने, लाइट बंद करने या ईमेल की समरी बनाने जैसे काम इससे किए जा सकते हैं.

प्रोजेक्ट में लगभग 2,000 रुपये का खर्च आया

पंकज ने कहा कि यह डिवाइस 1970 के दशक के उनके डेस्क पर रखे एक रेगुलर टेलीफोन जैसा दिखता है, लेकिन इसके अंदर एक छोटा AI सिस्टम फिट किया गया है. इस प्रोजेक्ट में लगभग $25 (लगभग Rs 2,000) का खर्च आया. इसे एक डमी फोन, एक रास्पबेरी पाई और दूसरे हार्डवेयर पार्ट्स का इस्तेमाल करके बनाया गया.

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मैंने इसे मजे के लिए बनाया : पंकज

पंकज ने यह भी कहा कि उन्हें पक्का नहीं पता कि लोग डिवाइस के ट्यूटोरियल में दिलचस्पी लेंगे या नहीं, लेकिन मैंने इसे मजे के लिए बनाया है. उन्होंने कहा कि डेस्क पर इस विंटेज प्लस AI का होना बहुत मजेदार है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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