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Home Technology Google Play Store Policy: 1 सितंबर से प्ले स्टोर से गायब हो जाएंगे ये मोबाइल ऐप्स, आखिर क्यों सख्त हुआ गूगल?

Google Play Store Policy: 1 सितंबर से प्ले स्टोर से गायब हो जाएंगे ये मोबाइल ऐप्स, आखिर क्यों सख्त हुआ गूगल?

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Google Play Store Policy: 1 सितंबर से प्ले स्टोर से गायब हो जाएंगे ये मोबाइल ऐप्स, आखिर क्यों सख्त हुआ गूगल?
Google Play Store Policy Update

Google Play Store Policy Update News: आगामी 1 सितंबर से गूगल अपनी प्ले स्टोर की पॉलिसी में कुछ बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. इसका असर गूगल प्ले स्टोर पर दिखने का मिलेगा. यूजर्स को स्पैम से निजात दिलाने के लिए गूगल ने कई अपडेट्स रोलआउट किये हैं. उम्मीद है कि इससे यूजर एक्सपीरिएंस बेहतर होगा.

गूगल ने क्यों लिया ऐप्स को हटाने का फैसला?

गूगल नये अपडेट के तहत आगामी 1 सितंबर से अपने प्ले स्टोर से हजारों संख्या में लो क्वॉलिटी ऐप्स की छुट्टी कर सकता है. टेक कंपनी ने ऐसा निर्णय अपनी क्वॉलिटी कंट्रोल पॉलिसी को देखते हुए लिया है, जो यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़ा है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि खराब क्वॉलिटी की बनावट और खराब डिजाइन वाले ऐप मैलवेयर का अड्डा हो सकते हैं. इसके साथ ही, ऐसे ऐप्स यूजर्स की निजी और गोपनीय जानकारी पर हाथ साफ कर सकते हैं. गूगल इन्हीं वजहों से इन ऐप्स को हटा रहा है.

गूगल के इस एक्शन से कौन होगा प्रभावित?

गूगल प्ले स्टोर पर हजारों लो-क्वॉलिटी ऐप्स हैं. ये फ्री में प्रीमियम सर्विस ऑफर करते हैं. इसके बदले यूजर्स से उनके कॉन्टैक्ट और फोटो जैसी जरूरी चीजों का ऐक्सेस हासिल कर लेते हैं. ये चीजें हैकिंग की वजह बनती हैं. ऐसे फ्री लो-क्वॉलिटी ऐप्स को अगर आपने भी अपने फोन में डाउनलोड कर रखा है, तो सतर्क हो जाएं. ऐसे संदिग्ग्ध ऐप्स से दुनियाभर में एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं.

गूगल के इस एक्शन की वजह क्या है?

गूगल ने कहा है कि मैलवेयर वाले और थर्ड पार्टी ऐप्स के लिए नये प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं. गूगल प्ले स्टोर पर लिस्टेड ऐप से फ्रॉड की खबरें लंबे समय से आ रही थीं. इन्हीं चीजों के बीच क्रिप्टो ऐप डाउनलोड करने पर फ्रॉड की खबर भी आयी. इस मामले के बाद गूगल ने सख्ती दिखाई और नये बदलावों को मंजूरी दी. बताते चलें कि गूगल अपने एंड्रॉयड प्ले स्टोर से पहले भी कई ऐप्स हटाता रहा है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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