[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology पुराना स्मार्टफोन फेंकने से पहले रुकिए, Google के पास है इसके लिए बड़ा प्लान, जानें पूरा मामला

पुराना स्मार्टफोन फेंकने से पहले रुकिए, Google के पास है इसके लिए बड़ा प्लान, जानें पूरा मामला

0
पुराना स्मार्टफोन फेंकने से पहले रुकिए, Google के पास है इसके लिए बड़ा प्लान, जानें पूरा मामला
पुराने स्मार्टफोन्स के मदरबोर्ड से तैयार किया गया कंप्यूटिंग क्लस्टर (Photo: AI Generated)

पुराने स्मार्टफोन अक्सर हमारे घरों में किसी दराज या अलमारी में सालों तक पड़े रहते हैं, या फिर कुछ लोग उन्हें नए फोन लेने के बाद रीसायकल कर देते हैं. लेकिन अब Google ने इन पुराने फोन्स के लिए एक बिल्कुल नया और दिलचस्प आइडिया पेश किया है. टेक कंपनी के एक नए रिसर्च के मुताबिक, पुराने स्मार्टफोन सिर्फ बेकार नहीं हैं. उन्हें छोटे-छोटे कंप्यूटिंग क्लस्टर में बदलकर दोबारा यूज किया जा सकता है. यानी ये फोन मिलकर क्लाउड एप्लिकेशन, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स को पावर दे सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा और कंप्यूटिंग का एनवायरनमेंट पर पड़ने वाला असर भी काफी हद तक कम होगा. 

फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग को लेकर Google की नई पहल

यह रिसर्च University of California San Diego के साथ मिलकर की गई है, जिसमें एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट पर काम हो रहा है जिसे ‘फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग’ कहा जाता है. इस आइडिया का मकसद पुराने स्मार्टफोन्स को फेंकने के बजाय उनका दोबारा यूज करना है. यानी जो फोन अब यूज नहीं हो रहे, उनके अंदर के पावरफुल हार्डवेयर को एक नया जीवन देना.

इस प्रोसेस में सबसे पहले फोन से डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा और बाहरी पार्ट्स हटा दिए जाते हैं. इसके बाद जो हिस्सा बचता है, वो मदरबोर्ड होता है. इसमें ही प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज जैसे अहम कंपोनेंट्स मौजूद होते हैं. इन बचे हुए मदरबोर्ड्स को आपस में जोड़कर एक नेटवर्क बनाया जाता है और उन्हें Linux बेस्ड सिस्टम पर चलाया जाता है. खास बात यह है कि इन सभी जुड़े हुए डिवाइसेज को Kubernetes की मदद से मैनेज किया जा सकता है. यह आमतौर पर क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को कंट्रोल और ऑर्गनाइज करने के लिए यूज होता है.

पुराने स्मार्टफोन कैसे बन सकते हैं डेटा सेंटर का हिस्सा?

Google की एक रिसर्च के मुताबिक, सिर्फ 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन मिलकर कुछ खास तरह के कामों में एक छोटे सर्वर जैसी परफॉर्मेंस दे सकते हैं. यानी जो फोन हम यूज के बाद बेकार समझकर रख देते हैं, वही मिलकर एक मिनी डेटा सेंटर की तरह काम कर सकते हैं. रिसर्चर्स का कहना है कि अगर हजारों पुराने मोबाइल्स को आपस में जोड़ दिया जाए, तो एक ऐसा पावरफुल कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार किया जा सकता है जो क्लाउड सर्विसेज और रिसर्च जैसे भारी काम भी संभाल सके.

इसी दिशा में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के रिसर्चर्स एक बड़ा प्रोजेक्ट बना रहे हैं, जिसमें करीब 2000 पुराने Pixel स्मार्टफोन्स का क्लस्टर तैयार करने की प्लानिंग है. इस सिस्टम का यूज सिस्टम प्रोग्रामिंग और पैरलल कंप्यूटिंग जैसे कोर्स पढ़ाने में भी किया जाएगा. इसके साथ ही, यह प्रोजेक्ट साइंटिस्ट्स को यह समझने में भी मदद करेगा कि जब नॉर्मल कंज्यूमर डिवाइसेज को डेटा सेंटर जैसे माहौल में यूज किया जाता है, तो वे कैसे परफॉर्म करते हैं.

क्या फोन क्लस्टर सर्वर AI मॉडल चला पाएंगे?

Google यह नहीं कह रहा है कि अब बड़े-बड़े AI मॉडल जैसे Gemini को ट्रेन करने के लिए यूज होने वाले पावरफुल GPU क्लस्टर्स की जगह फोन वाले क्लस्टर्स ले लेंगे. ऐसा बिल्कुल नहीं है. असल में इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ छोटे और मीडियम लेवल के क्लाउड कामों को संभालना है. मतलब वो भारी-भरकम AI ट्रेनिंग नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जरूरी काम जैसे यूनिवर्सिटी का रिसर्च वर्क, एजुकेशनल टास्क, वेब सर्विसेज, ऑनलाइन ग्रेडिंग सिस्टम, क्लाउड पर चलने वाले डेवलपमेंट टूल्स और Jupyter Notebook जैसी चीजें.

यह भी पढ़ें: एक अक्षर को बचाने के लिए Microsoft ने लुटाए 188 करोड़ रुपए, क्या है वो अक्षर?

Previous article उत्तरी बंगाल में ऑरेंज अलर्ट, दक्षिणी बंगाल में चटक धूप, जानें पश्चिम बंगाल का मौसम अपडेट
Next article 8 महीने से मानदेय नहीं, आर्थिक संकट में सेविका-सहायिकाएं, छह सूत्री मांगों पर बनी सहमति
Avatar Of Ankit Anand
अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel