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Home Technology Google Doodle Flat White Coffee : आज का गूगल डूडल फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के नाम, जानिए इसकी खूबियां और क्या है इतिहास

Google Doodle Flat White Coffee : आज का गूगल डूडल फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के नाम, जानिए इसकी खूबियां और क्या है इतिहास

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Google Doodle Flat White Coffee : आज का गूगल डूडल फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के नाम, जानिए इसकी खूबियां और क्या है इतिहास

Google Doodle Flat White Coffee Day : सर्च इंजन गूगल खास मौकों पर डूडल बनाता है. आज यानी 11 मार्च का गूगल डूडल फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के नाम पर है. फ्लैट व्हाइट कॉफी एक एस्प्रेसो आधारित ड्रिंक है, और इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हुई थी. फ्लैट व्हाइट कॉफी डे पर गूगल डूडल भारत सहित कई देशों में दिखाई दे रहा है.

क्या है फ्लैट व्हाइट कॉफी डे?

11 मार्च की तारीख को हर साल पूरी दुनिया में फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के तौर पर मनाया जाता है. साल 2011 में फ्लैट व्हाइट कॉफी डे को ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में शामिल किया था. ऐसा माना जाता है कि यह पेय 1980 के दशक से सिडनी और ऑकलैंड के रेस्त्रांओं के मेन्यू में दिखाई देना शुरू हुआ. फ्लैट व्हाइट कॉफी गर्म दूध के साथ बनाया जाने वाला कॉफी का एक वेरिएंट होता है.

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कैसे बनती है फ्लैट व्हाइट कॉफी?

फ्लैट व्हाइट कॉफी एक सफेद एस्प्रेसो शॉट से बनी होती है, जिसके ऊपर उबले हुए दूध और माइक्रो-फोम की एक पतली-सी परत चढ़ी हुई होती है और इसे पारंपरिक रूप से सेरेमिक कप में सर्व किया जाता है. फ्लैट व्हाइट कॉफी उन लोगों के लिए खासतौर पर है, जो कॉफी में झाग से बचना चाहते हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के कई कैफे में यह कॉफी काफी लोकप्रिय हो चुकी है.

कॉफी कल्चर में आ गया काफी बदलाव

फ्लैट व्हाइट कॉफी डे के मौके पर आपको बताते चलें कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अनेक रेस्त्राओं में अक्सर फ्लैट व्हाइट कॉफी में अपनी स्किल दिखाते और निखारते हुए बरिस्ता नजर आ जाते हैं और खूबसूरत आर्टवर्क भी क्रिएट करते रहते हैं. बीते कुछ वर्षों में कॉफी कल्चर में काफी बदलाव आ गया है और फ्लैट व्हाइट कॉफी बनाने का तरीका भी काफी बदल गया है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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