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Home Technology Geyser vs Heating Rod: सर्दियों में गर्म पानी के लिए कौन है स्मार्ट, सेफ और बजट-फ्रेंडली ऑप्शन?

Geyser vs Heating Rod: सर्दियों में गर्म पानी के लिए कौन है स्मार्ट, सेफ और बजट-फ्रेंडली ऑप्शन?

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Geyser vs Heating Rod: सर्दियों में गर्म पानी के लिए कौन है स्मार्ट, सेफ और बजट-फ्रेंडली ऑप्शन?
गीजर vs हीटिंग रॉड

Geyser vs Heating Rod: सर्दियां आते ही गीजर और हीटिंग रॉड की डिमांड बढ़ जाती है. गर्म पानी के लिए कई घरों में गीजर का इस्तेमाल किया जाता है तो कई घरों में हीटिंग रॉड का. कई लोगों को लगता है कि गीजर के मुकाबले हीटिंग रॉड ज्यादा सस्ता है और इसे इस्तेमाल करने पर ज्यादा बिजली भी नहीं लगती है. वहीं, गीजर थोड़े महंगे आते हैं लेकिन कई लोग को गीजर ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक लगता है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये कंफ्यूजन रहता है कि गीजर और हीटिंग रॉड दोनों ही गर्म पानी देने के काम आते हैं, लेकिन कीमत बिजली खर्च, और सेफ्टी के लिहाज से कौन सा बेहतर है? अगर आप भी इसी कंफ्यूजन में हैं, तो यहां जानिए आपके लिए कौन सा सही है.

Heating Rod क्या होते हैं?

हीटिंग रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक डिवाइस है, जिसे इमर्शन रॉड के नाम से भी जाना जाता है. हीटिंग रॉड को पानी की बाल्टी में डालकर इस्तेमाल किया जाता है. गीजर के मुकाबले यह एक लो-कॉस्ट और आसान ऑप्शन है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका बजट कम है या जो किराये के घर में रहते हैं. यह ऑफलाइन मार्केट से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर भी आसानी से मिल जाएगा. 300 रुपये से लेकर 1000 रुपये के बीच इसे खरीदा जा सकता है. वहीं, इसे इस्तेमाल करने पर बिजली की खपत भी कम होती है.

क्या होते हैं Geyser?

गीजर की बात करें, तो यह फिक्स्ड इलेक्ट्रिक या गैस डिवाइस है, जो पाइपलाइन के जरिए पानी को गर्म करता है. इसे लगाने के लिए बाथरूम में अच्छा-खासा स्पेस चाहिए होता है. हालांकि, हीटिंग रॉड के मुकाबले गीजर थोड़ा महंगा होता है. 2000 रुपये इसकी शुरुआती कीमत है. यह अलग-अलग लीटर कैपेसिटी, साइज और स्मार्ट फीचर्स के साथ आता है. अगर गीजर की कैपेसिटी ज्यादा है, तो एक बार पानी गर्म करने के बाद 2 से 3 लोग उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही कुछ गीजर ज्यादा देर तक पानी गर्म भी रखते हैं, जिससे बार-बार गीजर ऑन करने की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा पाइपलाइन से जुड़े होने के कारण आप किचन में भी गर्म पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे.

Geyser vs Heating Rod: बिजली की खपत कौन करता है ज्यादा?

बिजली खपत की बात करें, तो अगर आप एक 1.5 kW के हीटिंग रॉड का इस्तेमाल 20 से 30 मिनट के लिए कर रहे हैं, तो यह करीब 0.75 यूनिट बिजली की खपत करेगी. ऐसे में 10 रुपये यूनिट के हिसाब से महीने भर में बिजली बिल पर आपको लगभग 200 से 250 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. वहीं, गीजर 2 से 3KW तक में आते हैं. ऐसे में अगर इसका इस्तेमाल 10 से 15 मिनट तक करते हैं, तो लगभग 0.5 यूनिट बिजली की खपत होगी, जिससे 10 रुपये यूनिट के हिसाब से महीने भर में लगभग 150 रुपये का खर्च पड़ेगा. हालांकि, बिजली की खपत गीजर के रेटिंग पर भी डिपेंड करती है. यानी की गीजर जितनी ज्यादा रेटिंग वाला होगा, बिजली की खपत उतनी कम होगी और बिजली बिल भी उतना ही कम होगा.

Geyser vs Heating Rod: कौन है सस्ता ऑप्शन?

मार्केट में आपको हीटिंग रॉड भले ही सस्ते मिलें, लेकिन अगर आप सच में पैसे बचाना चाहते हैं, तो फिर गीजर ही अच्छा ऑप्शन है. गीजर के इंस्टोलेशन में आपके पैसे खर्च होंगे, लेकिन बिजली बिल की बचत के साथ-साथ ये आरामदायक भी है. साथ ही गीजर में स्मार्ट फीचर जैसे ऑटो कट फीचर मिलता है, जिससे पानी गर्म होने के बाद ये ऑटो कट हो जाते हैं और बिजली की खपत भी नहीं करते. जबकि हीटिंग रॉड तब तक बिजली का इस्तेमाल करते हैं, जब तक उसे ऑफ न कर दिया जाए.

Geyser vs Heating Rod: कौन है ज्यादा सेफ?

सुरक्षा को लेकर बात करें, तो सेफ्टी ऑप्शंस ज्यादा गीजर में ही मिलते हैं. सस्ते होने के साथ-साथ हीटिंग रॉड के कुछ नुकसान भी हैं. हीटिंग रॉड पैसे तो बचाता है, लेकिन इससे करंट लगने का खतरा भी होता है. खासकर बच्चों और पेट्स वाले घर में ज्यादा नजर रखना पड़ता है. सर्दियों में इस तरह के कई मामले भी सामने आ चुके हैं. ऐसे में इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना होता है. इसके अलावा हीटिंग रॉड से पानी सीमित मात्रा में ही गर्म किया जा सकता है. वहीं, हीटिंग रॉड के मुकाबले गीजर ज्यादा सेफ है. गीजर से करंट लगने का खतरा भी कम होता है और इसमें सेफ्टी से जुड़े फीचर्स भी दिए रहते हैं. ऐसे में कुल मिलाकर गीजर आपके लिए ज्यादा अच्छा ऑप्शन है.

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शिवानी कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर टेक-ऑटो कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में वह 3 सालों से सक्रिय हैं. वह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं. वह आसान भाषा और साफ तरीके से खबर लिखती हैं. टेक कैटेगरी में वह स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स पर खबर लिखती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी शिवानी नई कार-बाइक लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटो अपडेट्स, कार और बाइक से जुड़े टिप्स व नई तकनीक पर खबरें लिखती हैं. वह टेक और ऑटो की खबरों को आसान तरीके से पेश करती हैं, ताकि हर रीडर उसे आसानी से समझ सके. उनकी लेखन शैली आसान, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है. शिवानी ने करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे कंटेन्ट राइटिंग की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिवानी ने Lagatar.Com और The News Post जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है. यहां उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य न्यूज बीट पर कंटेंट तैयार किया. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में उनकी खास रुचि है और वह लगातार नए विषयों पर बेहतर और भरोसेमंद कंटेंट तैयार कर रही हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शिवानी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि रीडर्स तक सही, काम की खबरें और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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