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Home Technology Dark Side of Technology: साइबर अटैक्स में भी होने लगा AI का इस्तेमाल, एडवांस्ड सिक्योरिटी इंतजाम की जरूरत

Dark Side of Technology: साइबर अटैक्स में भी होने लगा AI का इस्तेमाल, एडवांस्ड सिक्योरिटी इंतजाम की जरूरत

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Dark Side of Technology: साइबर अटैक्स में भी होने लगा AI का इस्तेमाल, एडवांस्ड सिक्योरिटी इंतजाम की जरूरत
Dark Side of Technology / Unsplash

Dark Side of Technology: प्रौद्योगिकी पर तेजी से निर्भर होती दुनिया में साइबर अपराधी तीखे हमलों को अंजाम देने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) का दुरुपयोग कर रहे हैं. उद्योग से जुड़े एक विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे में व्यक्तियों और संगठनों, दोनों के लिए गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं. स्टार हेल्थ से जुड़ी हाल की गंभीर डेटा उल्लंघन की रिपोर्ट इस खतरनाक प्रवृत्ति का उदाहरण है, जिससे उन्नत साइबर सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत का पता चलता है.

एआई से होने लगे ऑटोमैटिक साइबर अटैक्स

साइबर सुरक्षा फर्म क्विक हील में एंटीवायरस की रणनीति और उत्पाद संरक्षक प्रमुख स्नेहा काटकर ने कहा है कि साइबर अपराध के परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आया है. उन्होंने कहा, आज साइबर अपराधी हमलों को स्वचालित करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे इन हमलों को अंजाम देने के लिए कृत्रिम मेधा का उपयोग कर रहे हैं. यह काम इतनी सफाई से किया जाता है कि बेहद समझदार लोग भी इसका शिकार हो जाते हैं.

खतरों से बचाव करना चुनौतीपूर्ण

पीटीआई-भाषा से एक बातचीत के दौरान काटकर ने कहा कि यह स्वचालन उन्हें पारंपरिक सुरक्षा उपायों से बचने की गुंजाइश देता है, जिससे सबसे मजबूत प्रणालियों के लिए भी ऐसे खतरों से बचाव करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. उन्होंने कहा कि स्टार हेल्थ में हाल में हुआ डेटा उल्लंघन डिजिटल बुनियादी ढांचे में मौजूद कमजोरियों की याद दिलाता है. काटकर ने कहा कि जब भी ऐसे उल्लंघन हों, कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं को इस बारे में बताना चाहिए.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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