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Home Technology हाथों के इशारे से उड़ते ड्रोन्स: जानिए फैन शिसान के रोबोटिक स्वॉर्ड स्वॉर्म की कहानी

हाथों के इशारे से उड़ते ड्रोन्स: जानिए फैन शिसान के रोबोटिक स्वॉर्ड स्वॉर्म की कहानी

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हाथों के इशारे से उड़ते ड्रोन्स: जानिए फैन शिसान के रोबोटिक स्वॉर्ड स्वॉर्म की कहानी
फैंटेसी से रियलिटी तक: चीनी इंजीनियर ने बनाया हाथों के इशारे से उड़नेवाला ड्रोन स्वॉर्म / फोटो सोशल मीडिया से

Robotic Drone Swarm Viral Video: चीन की तकनीकी दुनिया में एक नया चमत्कार सामने आया है, जो ऑटोमोबाइल और रोबोटिक्स के क्षेत्र को नई दिशा दे रहा है. सिचुआन प्रांत के चेंगदू शहर से ताल्लुक रखने वाले टेक इन्फ्लुएंसर और तलवार प्रेमी फैन शिसान ने एक ऐसा रोबोटिक ड्रोन स्वॉर्म बनाया है, जो पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट्स की वूशिया फैंटेसी को हकीकत में बदल देता है. ये ड्रोन्स तलवार के आकार में डिजाइन किए गए हैं और हाथों के इशारों से नियंत्रित होते हैं, जो भविष्य के वाहनों की अवधारणा को चुनौती दे रहे हैं. ऑटोमोबाइल कैटेगरी में इसे एक इनोवेटिव व्हीकल टेक्नोलॉजी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ड्रोन्स अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) का हिस्सा हैं और स्वार्म टेक्नोलॉजी से लैस हैं.

हर ड्रोन एक क्वाॅडकॉप्टर

फैन शिसान, जो चीनी सोशल मीडिया पर एक जाना-माना चेहरा हैं, एक स्वॉर्ड एंथुसिआस्ट हैं. उन्होंने पहले एक बड़ा उड़ने वाला तलवार जैसा होवरबोर्ड बनाया था, जो इंसान को ले जा सकता है और जिसके लिए उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की लिस्ट में अपनी जगह भी बनाई. अब, 2025 के अंत में, उन्होंने 50 ऐसे ड्रोन्स बनाए हैं, जिनमें से 30 को एक साथ सिंक्रोनाइज्ड तरीके से उड़ाया जा सकता है. प्रत्येक ड्रोन एक क्वाॅडकॉप्टर की तरह काम करता है, जिसमें प्रोपेलर्स तलवार की नोक, हैंडल और क्रॉस-गार्ड पर लगे हैं. ये प्रोपेलर्स छिपे हुए हैं, जिससे ड्रोन्स असली उड़ने वाली तलवारें लगती हैं. कोई रिमोट कंट्रोल या ऐप नहीं, बल्कि सिर्फ मोशन-सेंसिंग ग्लव्स या डिवाइसेज से हाथों के मूवमेंट्स ट्रैक होते हैं. हाथ ऊपर उठाओ, ड्रोन्स हवा में उड़ जाते हैं; आगे धकेलो, तो वे उस दिशा में जाते हैं. ये ‘दस हजार तलवारों की वापसी’ जैसी वूशिया तकनीक से प्रेरित है, जहां हीरो मानसिक रूप से तलवारों को नियंत्रित करता है.

चीन की उड़ने वाली तलवारें: फैन शिसान का रोबोटिक ड्रोन स्वॉर्म जो हाथों से कंट्रोल होता है / varunmayya@youtube

Robotic Drone Swarm: एनिमे से निकली तलवारें!

इस प्रोजेक्ट की खासियत है इसका सिंक्रोनाइजेशन. फैन और उनकी छोटी टीम ने तीन महीने में ये ड्रोन्स डिजाइन किए. प्रोग्रामिंग से ये होवर करते हैं, फॉर्मेशन बनाते हैं और बिना किसी तार के मूवमेंट करते हैं. वायरल वीडियोज में फैन शिसान हाथ उठाते हैं और दर्जनों तलवारें एक साथ उड़ती हैं, डाइव करती हैं और वापस लौटती हैं. ये ड्रोन्स न सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए हैं, बल्कि ड्रोन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में स्वार्म टेक्नोलॉजी के एप्लीकेशन्स दिखाते हैं- जैसे सर्च एंड रेस्क्यू, सर्विलांस या यहां तक कि फ्यूचर ट्रांसपोर्टेशन में. दुनिया भर में इसे फ्यूचरिज्म, डेक्सर्टो और सीजीटीएन जैसे प्लैटफॉर्म्स पर सराहा गया है.रेडिट और इंस्टाग्राम पर यूजर्स इसे ‘रियल लाइफ योंडू’ या ‘एनिमे से निकली तलवारें’ कह रहे हैं.

हॉबी से शुरू हुआ प्रोजेक्ट

फैन का लक्ष्य है ‘दस हजार तलवारों को एक’ बनाने का, जो क्लासिक चीनी फैंटेसी की याद दिलाता है. ये प्रोजेक्ट एक हॉबी से शुरू हुआ, लेकिन अब रोबोटिक्स और ऑटोमोटिव इनोवेशन का प्रतीक बन गया है. चीन की ड्रोन इंडस्ट्री, जैसे डीजेआई, से अलग ये इंडिविजुअल क्रिएटर का काम है, जो युवाओं को इंस्पायर कर रहा है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है- ट्रैफिक मॉनिटरिंग से लेकर डिलीवरी तक. फैन का ये स्वॉर्म भविष्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के साथ इंटीग्रेट हो सकता है.

कुल मिलाकर, फैन शिसान की ये क्रिएशन टेक्नोलॉजी और कल्चर का परफेक्ट ब्लेंड है. ये न सिर्फ वायरल हो रही है, बल्कि ऑटोमोबाइल की दुनिया में नई संभावनाएं खोल रही है. अगर आप टेक और व्हीकल इनोवेशन के शौकीन हैं, तो ये स्टोरी आपको जरूर इंस्पायर करेगी.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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