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Home Technology ChatGPT से “Please” और “Thank You” बोलना कितना महंगा पड़ता है OpenAI को?

ChatGPT से “Please” और “Thank You” बोलना कितना महंगा पड़ता है OpenAI को?

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ChatGPT से “Please” और “Thank You” बोलना कितना महंगा पड़ता है OpenAI को?
चैटजीपीटी डाउन, दुनियाभर में आउटेज, यूजर्स प्रभावित

ChatGPT Thank You Cost: जब आप ChatGPT से बात करते हुए “Please” या “Thank You” जैसे शिष्ट शब्द इस्तेमाल करते हैं, तो यह सिर्फ अच्छे मैनर्स नहीं दिखाता — बल्कि OpenAI को $$$ में खर्च भी आता है!

कितना खर्च?

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में बताया कि ऐसे विनम्र शब्दों के साथ किए गए हर बातचीत में कंपनी को बिजली के खर्च के तौर पर लाखों डॉलर चुकाने पड़ते हैं. वजह? हर बार ChatGPT जवाब देने के लिए गिनती में नहीं, अरबों डेटा पॉइंट्स प्रोसेस करता है, चाहे वह किसी बड़े सवाल का जवाब हो या सिर्फ “You’re welcome” कहना.

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2024 में एआई डेटा सेंटर्स की बिजली खपत

  • दुनिया भर में AI डेटा सेंटर्स ने 2024 में करीब 415 टेरावॉट-ऑवर्स (TWh) बिजली की खपत की.
  • यह इतनी बिजली है कि इससे पूरे भारत के कई राज्यों को एक साल तक रोशन किया जा सकता है!

तो अब क्या “Thank You” नहीं बोलें?

नहीं! सैम ऑल्टमैन ने ये बात मजाकिया अंदाज में कही थी, ताकि लोगों को बताया जा सके कि AI कितना भारी इंफ्रास्ट्रक्चर मांगता है.
आप आराम से शिष्ट भाषा का प्रयोग करते रहें, पर साथ ही AI के एनर्जी यूसेज को लेकर सचेत रहना भी जरूरी है.

आपके लिए बोनस फैक्ट

ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडल हर बार जवाब देने के लिए जितना काम करते हैं, वो एक स्मार्टफोन को पूरे दिन चलाने से कहीं ज्यादा एनर्जी लेता है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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