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Home Technology ChatGPT ने शिक्षा में खोले मौके और खतरे के रास्ते, जानिए कुछ चीजें मशीनों पर क्यों नहीं छोड़ी जा सकतीं

ChatGPT ने शिक्षा में खोले मौके और खतरे के रास्ते, जानिए कुछ चीजें मशीनों पर क्यों नहीं छोड़ी जा सकतीं

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ChatGPT ने शिक्षा में खोले मौके और खतरे के रास्ते, जानिए कुछ चीजें मशीनों पर क्यों नहीं छोड़ी जा सकतीं
शिक्षा का नया दौर: एआई और ईमानदारी की चुनौती

अब पढ़ाई में एआई (जैसे ChatGPT) का इस्तेमाल आम हो गया है. शिक्षक और छात्र दोनों ही इसे पढ़ने, सीखने और लिखने में काम में ला रहे हैं. इससे शिक्षा का तरीका बदल रहा है.बड़ा सवाल यह है कि असली सीख को कैसे परखा जाए, जब मशीनें भी इंसानों जैसी भाषा बना सकती हैं.

पोस्ट-प्लेजरिज्म युग

कनाडा के कॉलेजों के एक अध्ययन में कहा गया कि अब हम “पोस्ट-प्लेजरिज्म” दौर में हैं. यानी एआई का इस्तेमाल हमेशा नकल नहीं माना जाएगा. शिक्षक मानते हैं कि एआई को रोका नहीं जा सकता, इसलिए जरूरी है कि नीतियां बदली जाएं और छात्रों को जिम्मेदारी से एआई का उपयोग करना सिखाया जाए.

प्रॉम्प्टिंग नया हुनर

एआई से सही सवाल पूछना भी एक कौशल है. इसे “प्रॉम्प्टिंग” कहते हैं. इसमें साफ सोच, सही समझ और स्पष्ट संवाद की जरूरत होती है. अगर छात्र सही सवाल पूछ सकते हैं, तो यह उनकी समझ और विश्लेषण क्षमता दिखाता है.

आलोचनात्मक सोच की परीक्षा

शिक्षक छात्रों को एआई द्वारा बनाई गई सामग्री की जांच करने को कह सकते हैं. जैसे, एआई के सारांश या तर्कों में गलतियां ढूंढना. इससे पता चलेगा कि छात्र केवल जानकारी ले नहीं रहे, बल्कि उसे परख भी रहे हैं.

लेखन सबसे संवेदनशील क्षेत्र

लेखन को सबसे मानवीय और रचनात्मक काम माना गया है. विचार बनाने या भाषा सुधारने में एआई मदद कर सकता है, लेकिन पूरा लेख एआई से लिखवाना सही नहीं है. मौलिकता और रचनात्मकता इंसानों के पास ही रहनी चाहिए.

अवसर और चुनौती

एआई शिक्षा को नुकसान नहीं, बल्कि मदद भी कर सकता है. दिव्यांग छात्रों या नई भाषा सीखने वालों के लिए यह सहायक है. कई शिक्षक मानते हैं कि एआई को खतरे की तरह नहीं, बल्कि सुधार के साधन की तरह अपनाना चाहिए.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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