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Home Technology BOSS ने भारत को Microsoft Outage के खतरे से बचाया, डॉ कलाम का ब्रेनचाइल्ड है खास

BOSS ने भारत को Microsoft Outage के खतरे से बचाया, डॉ कलाम का ब्रेनचाइल्ड है खास

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BOSS ने भारत को Microsoft Outage के खतरे से बचाया, डॉ कलाम का ब्रेनचाइल्ड है खास
boss linux saves in microsoft outage

BOSS OS Bharat Operating System Solutions: माइक्रोसॉफ्ट आउटेज ने देश-दुनिया में तकनीक पर निर्भरता के खतरे को उजागर कर दिया है. इस तकनीकी गड़बड़ी ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश को युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध या विस्फोट से नहीं, बल्कि एक सिस्टम बग से अस्थिर किया जा सकता है. भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की जरूरत को बहुत पहले भांप लिया था. कलाम की रणनीति के कारण भारत के पास अपना ऑपरेटिंग सिस्टम ‘भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस’ (बॉस) मौजूद है. ओपन सोर्स लीनक्स सिस्टम पर काम करने वाले ‘बॉस’ के कारण ही इस ऑउटेज से बच गये.

माइक्रोसॉफ्ट आउटेज का असर पश्चिमी देशों, ऑस्ट्रेलिया और जापान जितना भारत पर नहीं

माइक्रोसॉफ्ट आउटेज का जितना असर पश्चिमी देशों, ऑस्ट्रेलिया और जापान पर पड़ा है, भारत में उतना असर नहीं देखा गया. यदि भारत की कंपनियां ‘बॉस’ सिस्टम को अपनाएं, तो विदेशों पर निर्भरता कम होगी. भारत में रेलवे टिकटिंग प्रणाली, स्टॉक एक्सचेंज, आधार, जीएसटी, एलआइसी, एसबीआइ सहित अन्य बैंकों में कोर बैंकिंग सेवाएं ‘बॉस’ की ही तरह लीनक्स आधारित ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करती हैं, जिससे ये संस्थान इस आउटेज से बच गए.

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ऑपरेटिंग सिस्टम का काम क्या है?

ऑपरेटिंग सिस्टम यानी ओएस, कंप्यूटर में मौजूद अन्य सभी प्रोग्रामों को नियंत्रित और मॉनिटर करता है. ओएस सॉफ्टवेयर का एक समूह है, जो कंप्यूटर हार्डवेयर संसाधनों का प्रबंधन करता है और कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए सामान्य सेवाएं प्रदान करता है.

रक्षा मंत्रालय में ‘माया’ ओएस

भारत के रक्षा मंत्रालय और सेना के तीनों अंगों में 15 अगस्त, 2023 से ‘माया’ ओएस (ऑपरेटिंग सिस्टम) लागू है, जिसे 2021 में भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तैयार किया था. सेना के सभी काम इसी ओएस के जरिये होते हैं.

कैसे काम करता है ‘बॉस’?

आइटी मंत्रालय के अधीन कार्यरत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) के द्वारा बनाया गया ‘बॉस’ लीनक्स आधारित ओपन एंड फ्री ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो डेस्कटॉप, लैपटॉप के साथ प्रिंटर, स्कैनर ऑपरेट करने में मदद करता है. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) इसी सिस्टम पर काम करता है. ‘बॉस’ के नियमित अपडेट वर्जन भी आते हैं. सबसे ताजा अपडेट ‘प्रज्ञा’ पिछले 15 मार्च को जारी हुआ है.

आउटेज का असर अब भी बरकरार

माइक्रोसॉफ्ट आउटेज का असर अभी तक खत्म नहीं हुआ है. ब्रिटेन, अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में रविवार को दर्जनभर उड़ानें प्रभावित रहीं. ब्रिटिश एयरवेज ने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर एक दर्जन उड़ानें रद्द कर दीं. वहीं, ऑस्ट्रेलिया में भी स्थिति सामान्य नहीं है. दुनियाभर में करीब 1500 उड़ानें रद्द रहीं थीं.

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माइक्रोसॉफ्ट आउटेज के कारण 85 लाख डिवाइसेस हुईं प्रभावित

माइक्रोसॉफ्ट आउटेज के कारण देश-दुनिया में 85 लाख डिवाइसेस प्रभावित हुईं हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने एक ब्लॉग में बताया कि साइबर सुरक्षा भागीदार क्राउडस्ट्राइक के अपडेट की वजह से 85 लाख विंडोज डिवाइसेस प्रभावित हुईं हैं या सभी विंडोज मशीनों में से एक फीसदी से भी कम को प्रभावित किया है. क्राउडस्ट्राइक ने एक स्केलेबल सॉल्यूशन डेवलप करने में मदद की है. यह माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से ठीक करने में मदद करेगा. वहीं, गड़बड़ी को ठीक करने और सेवाओं को फिर से बहाल करने के लिए सैकड़ों इंजीनियरों और विशेषज्ञों को लगाया गया है.

क्राउडस्ट्राइक को 73 हजार करोड़ का नुकसान

माइक्रोसॉफ्ट आउटेज से पहले क्राउडस्ट्राइक का मार्केट कैप करीब 83 अरब डॉलर का था. इस आउटेज के बाद कंपनी के शेयर अचानक गिर गये. इसके बाद कंपनी का मार्केट कैप 8.8 अरब डॉलर कम हो गया. ऐसे में कंपनी को लगभग 73 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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