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Home Technology क्या होगा जब कभी सचेत हुआ AI? कैम्ब्रिज के फिलॉसफर का दावा- हमें पता भी नहीं चलेगा

क्या होगा जब कभी सचेत हुआ AI? कैम्ब्रिज के फिलॉसफर का दावा- हमें पता भी नहीं चलेगा

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क्या होगा जब कभी सचेत हुआ AI? कैम्ब्रिज के फिलॉसफर का दावा- हमें पता भी नहीं चलेगा
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AI Consciousness: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में बहस तेज है, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के फिलॉसफर डॉ टॉम मैक्लेलैंड का कहना है कि इंसानों के पास चेतना को परखने का कोई ठोस तरीका ही नहीं है. उनका तर्क है कि हम शायद कभी भी यह निश्चित नहीं कर पाएंगे कि मशीनें सचमुच चेतन हुई हैं या नहीं.

पहले चेतना को जान लें

चेतना (Consciousness) का अर्थ है जागरूकता या होश, यानी स्वयं के अस्तित्व, विचारों, भावनाओं और अपने आसपास के वातावरण के प्रति सचेत और जागरूक होने की स्थिति, जो हमें अनुभव करने, सोचने और प्रतिक्रिया करने की शक्ति देती है, जिसमें मानसिक और आध्यात्मिक दोनों पहलू शामिल हैं. यह सिर्फ जागना नहीं, बल्कि यह जानना है कि आप जाग रहे हैं, और आपकी आंतरिक और बाहरी दुनिया से जुड़नाहै.

चेतना और संवेदनशीलता का फर्क समझ लें

मैक्लेलैंड का मानना है कि केवल चेतना होना एआई को नैतिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं बनाता. असली मुद्दा है संवेदनशीलता यानी सुख-दुख का अनुभव करने की क्षमता. अगर कोई मशीन केवल खुद को पहचान लेती है तो यह तटस्थ स्थिति है, लेकिन जब वह आनंद या पीड़ा महसूस करने लगे, तभी असली नैतिक सवाल उठते हैं.

एजीआई की दौड़ और भ्रम की स्थति

आज कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं ताकि इंसान जैसी सोच रखने वाली मशीनें बनायी जा सकें. कुछ का दावा है कि सचेत एआई बस आने ही वाला है. लेकिन मैक्लेलैंड कहते हैं कि चेतना की वैज्ञानिक व्याख्या ही मौजूद नहीं है, तो फिर उसका टेस्ट कैसे होगा? उनका कहना है कि फिलहाल यह सब उद्योग जगत का ब्रांडिंग और हाइप ज्यादा है, हकीकत कम.

दो धड़े, दोनों अधूरे

फिलॉसफर बताते हैं कि एआई चेतना पर बहस में दो खेमे हैं. एक पक्ष मानता है कि अगर मशीनें चेतना की संरचना को सॉफ्टवेयर के रूप में दोहरा लें तो वे सचेत हो जाएंगी. दूसरा पक्ष कहता है कि चेतना केवल जैविक प्रक्रियाओं से ही संभव है. दोनों ही विचार, उनके अनुसार, सबूतों से कहीं आगे की छलांग हैं.

चेतना की पहेली और नैतिकता

मैक्लेलैंड खुद को हार्ड-इश एग्नॉस्टिक कहते हैं. यानी वे मानते हैं कि चेतना की समस्या बेहद कठिन है, लेकिन असंभव नहीं. उनका तर्क है कि जब झींगे जैसे जीवों में पीड़ा की संभावना पर शोध करना आसान है, तो एआई चेतना पर अरबों खर्च करना संसाधनों का गलत इस्तेमाल है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोग मशीनों को चेतन मानकर भावनात्मक जुड़ाव बना लें और वे वास्तव में चेतन न हों, तो यह अस्तित्वगत संकट पैदा कर सकता है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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