[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology Aadhaar After Death: मौत के बाद आधार का क्या होता है? और होना क्या चाहिए?

Aadhaar After Death: मौत के बाद आधार का क्या होता है? और होना क्या चाहिए?

0
Aadhaar After Death: मौत के बाद आधार का क्या होता है? और होना क्या चाहिए?
Aadhaar In News: आधार डिएक्टिवेशन क्या और कब होता है?

Aadhaar After Death: RTI (सूचना का अधिकार) के जरिये हाल ही में सामने आया है कि पिछले 14 वर्षों के दौरान केवल 1.15 करोड़ आधार कार्ड ही डिएक्टिवेट किये गए हैं. वहीं, इसी अवधि में देश में लगभग 11 करोड़ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. यानी, मृत लोगों के अधिकतर आधार कार्ड अभी भी सक्रिय ही हैं. इंडिया टुडे टीवी द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है. इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारा आधार प्रणाली पर्याप्त रूप से अपडेट हो रही है? या फिर, इसके चलते सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग संभव है?

UIDAI की प्रक्रिया और इसके कमजोर पहलू क्या हैं?

UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) मृतक आधार डिक्टिवेशन प्रक्रिया में राज्य सरकार के डेथ सर्टिफिकेट और परिवार की सूचना पर निर्भर है. इसका मतलब है कि अगर कोई परिवार या स्थानीय प्रशासन समय पर जानकारी न भेजे, तो UIDAI का सिस्टम मृत लोगों की पहचान अपडेट नहीं कर पाएगा. इस बात से यह साफ है कि इस पूरी प्रक्रिया में मैनुअल रूप से हस्तक्षेप की आवश्यकता है, जो बहुत धीमी गति से होती है.

Aadhaar After Death: क्या समस्याएं हो सकती हैं?

सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग:

मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहने का मतलब है कि किसी जाली पहचान के जरिये वह योजनाएं या लाभ ले सकता है.

वित्तीय धोखाधड़ी:

बैंक खातों या सब्सिडी योजनाओं में मृत व्यक्ति की पहचान का उपयोग कर पैसा निकाला जा सकता है.

सुरक्षा जोखिम:

एक मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहना व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जोखिम भरा है, खासकर अगर वो आधार डिजिटल माध्यम से जुड़े हों.

Aadhaar After Death: विशेषज्ञ क्या सुझाव दे रहे हैं?

विशेषज्ञ इसे एक बड़ी चूक मानते हैं और सुझाव देते हैं कि:

  • डिजिटल डेथ-डेटाबेस बनाकर आधार प्रणाली से सीधे लिंक किया जाना चाहिए. इससे एक ऑटोमैटिक अपडेशन होता रहेगा.
  • ऑटोमेटेड डेटा इंटिग्रेशन के माध्यम से प्रक्रिया को तेज और भरोसेमंद बनाया जा सकता है.
  • कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किये जाने चाहिए, ताकि परिवार या अधिकारी समय पर जानकारी न दें तो भी प्रक्रिया शुरू हो सके.

ये उपाय न सिर्फ धोखाधड़ी को रोकेंगे, बल्कि संभावित सुरक्षा खामियों को भी खारिज करेंगे.

Aadhaar After Death: अन्य देशों में इसका मॉडल कैसा है?

  • UK में मृतक डेटा रजिस्टर को सीधे डेटाबेस जैसे बैंक और सरकारी संगठनों से जोड़ा गया है, जिससे अपडेटिंग रियल-टाइम होती है.
  • US में सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन मृत डेटा को आधार के साथ साझा करता है.
  • कुछ यूरोपीय देशों में डेटा पॉइंट्स को रियल टाइम अपडेट सिस्टम के साथ जोड़ा गया है, जिससे आधार सिस्टम का भरोसा मजबूत होता है.

Aadhaar After Death: आधार प्रणाली को अपडेट किया कितना जाना जरूरी?

भारत जैसे डिजिटल इंडिया के दौर में, आधार कार्ड एक पहचान पारदर्शिता और सरकारी व्यवस्था का आधार है. लेकिन जब मृतकों के आधार सक्रिय रहें, तो पहचान सत्यापन और संसाधनों के वितरण में गड़बड़ी पैदा होती है. इसलिए सिर्फ तकनीकी क्षमता का विकास पर्याप्त नहीं, डिजिटल डेथ डेटा सिस्टम, कानूनी सुधार और राज्य-केंद्र डेटा समन्वय का भी समान महत्व है. यदि ये अधूरे रहे, तो आधार सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठेगा. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि UIDAI को प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ एक आधुनिक, ऑटोमेटेड और डिजिटल दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.

Aadhaar को लेकर बड़ा अपडेट, पूरे देश में लागू होगा डिजिटल e-Aadhaar सिस्टम

Previous article Samastipur News:पीजी की पढ़ाई के लिए पलायन करना छात्र-छात्राओं की विवशता
Next article जीविका की ओर से प्रखंड स्तरीय ऋण शिविर का किया गया आयोजन
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel