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Home Technology आपकी रोज की ये 5 आदतें वॉशिंग मशीन को अंदर से कर रही हैं तबाह, समय रहते नहीं संभले तो पड़ेगा भारी

आपकी रोज की ये 5 आदतें वॉशिंग मशीन को अंदर से कर रही हैं तबाह, समय रहते नहीं संभले तो पड़ेगा भारी

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आपकी रोज की ये 5 आदतें वॉशिंग मशीन को अंदर से कर रही हैं तबाह, समय रहते नहीं संभले तो पड़ेगा भारी
वॉशिंग मशीन में कपड़े धोने समय न करें ये गलतियां (Pic-AI Generated)

Washing Machine: हम अपने पसंदीदा कपड़ों को सेफ रखने के लिए काफी मेहनत करते हैं. कभी लेबल चेक करना, रंग अलग करना, खास डिटर्जेंट चुनना, दाग पहले साफ करना और कपड़ों को नया-सा बनाए रखने की हर कोशिश करते हैं. लेकिन इस सब में हम उस मशीन को भूल जाते हैं, जो असली मेहनत करती है. आपकी वॉशिंग मशीन हर लोड चुपचाप संभाल लेती है, लेकिन रोजमर्रा की कुछ आदतें उसे धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ छोटी सी लगने वाली चीजें भी मशीन खराब सकती हैं और आगे चलकर महंगे रिपेयर या कम उम्र की वजह बन सकती हैं. आइए जानते हैं आखिर कौन-कौन सी हैं वो आदतें.

ज्यादा डिटर्जेंट मशीन के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता हैं

ज्यादा डिटर्जेंट डालने से कपड़े ज्यादा साफ नहीं होते, बल्कि मशीन के अंदर गंदगी जमने लगती है. एक्स्ट्रा साबुन ड्रम, पाइप और खासकर सेंसर पर चिपक जाता है, जिससे समय के साथ वे ठीक से काम नहीं करते. इसी वजह से कपड़ों में बदबू या सफेद दाग भी पड़ते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक नॉर्मल वॉश के लिए सिर्फ 2 चम्मच लिक्विड डिटर्जेंट काफी होता है.

छोटे कपड़े फिल्टर को जाम कर सकते हैं

छोटे कपड़े कई बार वॉशिंग मशीन के जरूरी हिस्सों को जाम कर सकते हैं. बेबी सॉक्स, इनरवियर, जूते के फीते या रूमाल जैसे कपड़े घूमते हुए ड्रम और मशीन की दीवारों के बीच फंस जाते हैं. अंदर पहुंचने पर ये फिल्टर या पाइप को ब्लॉक कर सकते हैं या पंप में उलझ सकते हैं, जिसकी मरम्मत कपड़े से कहीं ज्यादा महंगी पड़ती है. इससे बचने के लिए छोटे कपड़ों को हमेशा जालीदार लॉन्ड्री बैग में डालकर धोएं और एक साथ वॉश करें.

ज्यादा भारी कपड़े मशीन पर डालते हैं लोड

कंफर्टर, मोटे कंबल या छोटे गलीचे देखने में भले ही मशीन में आ जाएं, लेकिन पानी भीगने के बाद इनका वजन असमान हो जाता है. इससे मशीन के गियर, बेयरिंग और मोटर पर ज्यादा लोड पड़ता है, जिससे तेज आवाज आने लगती है और लंबे समय में नुकसान हो सकता है. अगर लोड बहुत भारी लगे, तो ऐसे कपड़े कमर्शियल वॉशर में धुलवाना बेहतर है.

जूते सही तरीके से न धोए जाएं, तो मशीन को कर सकते हैं खराब 

धुलाई के समय जूते अंदर उछलते हैं, जिससे खासकर स्पिन साइकल में ड्रम पर डेंट पड़ सकता है या अंदर के पार्ट्स ढीले हो सकते हैं. नुकसान कम करने के लिए जूतों को तकिए के कवर या वॉशिंग बैग में डालकर ठंडे पानी और जेंटल मोड पर धोएं, साथ में तौलिये भी डाल दें ताकि बैलेंस बना रहे. इनसोल और फीते पहले निकाल लें. ध्यान रखें कि लेदर, साबर, विनाइल और रबर के जूते मशीन में नहीं धोने चाहिए, क्योंकि नमी से गोंद कमजोर हो जाता है और जूते पूरी तरह खराब हो सकते हैं.

मेटल के हिस्से गंभीर खरोंच और डेंट का कारण बन सकते हैं

जेब में पड़े सिक्के, चाबियां या जिप के हिस्से देखने में छोटे लगते हैं, लेकिन ये वॉशिंग मशीन के ग्लास डोर पर दरार डाल सकते हैं या स्टील ड्रम को खरोंच सकते हैं. कपड़े डालने से पहले जेब खाली करने की आदत डालें. भारी हार्डवेयर वाली जैकेट्स को बेहतर है हाथ से या स्पॉट क्लीन करें, ताकि मशीन को नुकसान न पहुंचे.

यह भी पढ़ें: Washing Machine Tips: चलते-चलते रुक जा रही है वॉशिंग मशीन? अभी जान लें असली वजहें वरना फूंक जाएगी मोटर

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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