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Home Technology स्मार्ट रिंग के ये 4 फीचर्स स्मार्टवॉच को भी छोड़ देते हैं पीछे, खरीदने से पहले जरूर जानें

स्मार्ट रिंग के ये 4 फीचर्स स्मार्टवॉच को भी छोड़ देते हैं पीछे, खरीदने से पहले जरूर जानें

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स्मार्ट रिंग के ये 4 फीचर्स स्मार्टवॉच को भी छोड़ देते हैं पीछे, खरीदने से पहले जरूर जानें
स्मार्ट रिंग

स्मार्टवॉच लंबे समय से पॉपुलर वेयरेबल डिवाइस रही हैं, लेकिन अब मार्केट में एक नया और स्टाइलिश गैजेट तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. हम बात कर रहे हैं स्मार्ट रिंग की. उंगली में पहनने वाली ये छोटी-सी डिवाइस दिखने में भले ही नॉर्मल लगे, लेकिन काम बड़े कमाल के करती है. हार्ट रेट, स्लीप, बॉडी मूवमेंट और कई जरूरी हेल्थ डेटा को यह बेहद सटीक तरीके से ट्रैक करती है. खास बात यह है कि स्मार्ट रिंग कुछ ऐसे फायदे देती है, जो स्मार्टवॉच में आसानी से नहीं मिलते. आइए जानते हैं उन फायदों के बारे में.

बिना किसी रुकावट के हेल्थ ट्रैकिंग करते हैं 

स्मार्ट रिंग की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह बिना किसी झंझट के चुपचाप अपना काम करती रहती है. न कोई स्क्रीन, न बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और न ही लगातार ध्यान भटकाने वाली चीजें. यह आपके फिंगर में आराम से रहती है और बैकग्राउंड में आपकी हेल्थ और एक्टिविटी ट्रैक करती रहती है. वर्कआउट शुरू करने के अलावा आपको कुछ खास करने की जरूरत नहीं पड़ती. यह अपने आप आपका डेटा रिकॉर्ड करती रहती है, और जब मन करे, आप ऐप खोलकर अपनी पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं. सिंपल, स्मार्ट और बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के.

बैटरी लाइफ ज्यादातर स्मार्टवॉच के मुकाबले लंबी होती है

ज्यादातर स्मार्ट रिंग्स एक बार चार्ज करने पर कम से कम 4 दिन आराम से चल जाती हैं. बात करें Oura Ring 4 जैसी रिंग की तो, ये पूरे हफ्ते तक साथ निभा सकती है. ऐसा इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि इनमें डिस्प्ले नहीं होता, जो आमतौर पर सबसे ज्यादा बैटरी खपत करता है. वहीं, स्मार्टवॉच में Always-On Display, GPS या वर्कआउट ट्रैकिंग जैसे फीचर्स ऑन करते ही बैटरी तेजी से गिरने लगती है. कई स्मार्ट रिंग्स चार्जिंग केस के साथ आती हैं. बिल्कुल वायरलेस ईयरबड्स की तरह, बस रिंग केस में रखिए और चलते-फिरते चार्ज कर लीजिए. स्मार्टवॉच के साथ ऐसी सुविधा नहीं मिलती.

आपकी नींद में बाधा नहीं बनते

कई लोगों को स्मार्टवॉच पहनकर सोना बिल्कुल पसंद नहीं आता. रात में करवट बदलते समय ये भारी और असहज महसूस हो सकती है. ऊपर से, जिन स्मार्टवॉच की बैटरी सिर्फ एक दिन चलती है, उन्हें अक्सर रात में चार्ज करना पड़ता है, जिससे स्लीप ट्रैकिंग का फायदा ही नहीं मिल पाता. यहीं पर स्मार्ट रिंग बाजी मार लेती है. उंगली में आराम से फिट हो जाती है और थोड़ी देर बाद तो आपको एहसास भी नहीं होता कि आपने इसे पहना हुआ है. यही वजह है कि स्लीप ट्रैकिंग के लिए कई लोग इसे स्मार्टवॉच से बेहतर मानते हैं.

किसी भी फोन के साथ काम करते हैं

स्मार्ट रिंग्स Android और iPhone, दोनों के साथ आराम से काम करती हैं. बात करें Samsung Galaxy Ring की तो ये फिलहाल सिर्फ Android यूजर्स के लिए है. यानी अगर आप भविष्य में फोन बदलने का प्लान बनाते हैं, तब भी आपकी स्मार्ट रिंग आपका साथ नहीं छोड़ेगी. स्मार्ट रिंग्स के ऐप्स भी काफी आसान और यूजर-फ्रेंडली होते हैं. कई ऐप्स में AI फीचर्स भी मिलते हैं, जिनसे आप अपनी हेल्थ, नींद और एक्टिविटी से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं. सबसे बढ़िया बात यह है कि ये Apple Health और MyFitnessPal जैसे पॉपुलर हेल्थ ऐप्स के साथ भी आसानी से सिंक हो जाते हैं.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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