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आसनसोल में भाजपा के खिलाफ उसी का दांव चलेगी तृणमूल

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आसनसोल में भाजपा के खिलाफ उसी का दांव चलेगी तृणमूल

भाजपा के टिकट पर आसनसोल सीट से दो बार सांसद रहे बाबुल बना रहे तृणमूल की रणनीति

आसनसोल.

भाजपा की टिकट पर आसनसोल लोकसभा सीट से लगातार दो बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो इसबार भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ तृणमूल प्रार्थी की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं. जिसे लेकर गुरुवार रात दस बजे आसनसोल लोकसभा सीट को लेकर तृणमूल द्वारा गठित चुनाव कोर कमेटी के सदस्यों को लेकर स्थानीय एक होटल में मैराथन बैठक की. जिसमें भाजपा को घेरने के लिए क्या-क्या किया जाएगा? इस भीषण गर्मी में किस प्रकार प्रचार होगा? नामांकन जमा करने के दिन किन-किन विधानसभा क्षेत्रों से कितने लोग आएंगे? मुख्यमंत्री की सभा में कितने लोगों की भीड़ जुटेगी? चुनाव के दौरान नेताओं की भूमिका क्या होगी? इन सभी विषयों पर चर्चा हुई और सभी को उनकी जिम्मेदारी सौंपी गयी. बैठक में उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा, राज्य के श्रम व कानून मंत्री मलय घटक, राज्य के पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप मजूमदार, पांडवेश्वर के विधायक सह पार्टी के जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती, जिला चेयरमैन उज्ज्वल चटर्जी, रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी, राज्य सचिव वी.शिवदासन दासू, जिला परिषद के सभाधिपति विश्वनाथ बाउरी, आइएनटीटीयूसी के जिलाध्यक्ष अभिजीत घटक, महिला तृणमूल की जिलाध्यक्ष असीमा चक्रवर्ती, युवा तृणमूल के जिलाध्यक्ष पार्थ देवासी, अल्पसंख्यक सेल के जिलाध्यक्ष सैयद महफूदुल हसन, तृणमूल छात्र परिषद के जिलाध्यक्ष अभिनव मुखर्जी, एससी-ओबीसी सेल के जिलाध्यक्ष मोहन धीबर, एसटी सेल के जिलाध्यक्ष मंगल टुडू, किसान खेत मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष जयब्रत बैद्य, जिला तृणमूल के कोषाध्यक्ष अधीर गुप्ता और एकमात्र हिंदी नेता हिंदी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सिंटू कुमार भुइयां उपस्थित थे.

सूत्रों के अनुसार आसनसोल सीट पर श्री सिन्हा की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करने को लेकर कोलकाता से राज्य में सूचना तकनीकी मंत्री श्री सुप्रियो को भेजा गया. तृणमूल के राज्य सचिव श्री दासू ने कहा कि मंत्री श्री सुप्रियो को चुनाव में आसनसोल लोकसभा सीट का दायित्व दिया गया है. जिससे तृणमूल उम्मीदवार को काफी फायदा होगा.

गौरतलभ है कि आसनसोल लोकसभा सीट पर इसबार का चुनाव काफी मजेदार है. तृणमूल उम्मीदवार के रूप में जो चुनाव लड़ रहे है वह शत्रुघ्न सिन्हा 30 वर्षों से अधिक समय तक भाजपा में रहे. भाजपा ने दो बार राज्यसभा में भेजा और दो बार वे भाजपा की टिकट पर बिहार सरीफ से चुनाव लड़कर लोकसभा में पहुंचे. भाजपा के शासनकाल में केंद्रीय मंत्री भी रहे. भाजपा के चुनावी रणनीति को अच्छी तरह से जानते हैं. उनके खिलाफ भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलुवलिया को दो बार कांग्रेस ने और दो बार भाजपा ने राज्य सभा में भेजा है. भाजपा की टिकट पर दो बार वे लोकसभा में भी पहुंचे. केंद्र में मंत्री भी रहे. दोनों नेताओ को भाजपा की खूबी और कमजोरी अच्छी तरह पता है.

तृणमूल के पास एक तुरूप का एक्का बाबुल सुप्रियो हैं. दो बार वे भाजपा की टिकट से आसनसोल से सांसद बने. आसनसोल में भाजपा की हर कमजोरी और ताकत को सबसे अच्छी तरह से वे जानते हैं. भाजपा के खुफिया स्रोतों को भी वे जानते हैं जहां से भाजपा को हर प्रकार की मदद मिलती है. भाजपा के जीत का मूलमंत्र वे जानते हैं. तृणमूल खेमा में आने के बाद अब वे अपने पार्टी उम्मीदवार श्री सिन्हा की जीत सुनिश्चित करने के लिए सारे मूलमंत्रों का उपयोग करेंगे. जिसके लिए पार्टी ने उन्हें यहां भेजा है. श्री सुप्रियो और श्री सिन्हा दोनों ही भाजपा में बड़े खिलाड़ी थे. अब भाजपा की सारी चुनावी रणनीतियों को उसके खिलाफ ही उपयोग करने की रणनीति तैयार कर आगे बढ़ रहे हैं. भाजपा जिलाध्यक्ष बप्पा चटर्जी न कहा कि हर चुनाव में रणनीति अलग होती है.

भाजपा के जीत का मूलमंत्र सिर्फ पार्टी का उम्मीदवार ही उपयोग कर सकता है. बाबुल सुप्रियो दोनों ही बार प्रधानमंत्री के करिश्मा से जीत दर्ज की है. जितना रणनीति तैयार करना है कर ले चार जून को सच्चाई सामने आ जायेगी.

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