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इस साल कम से कम 36 मूर्तियां भेजी जायेंगी विदेश

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इस साल कम से कम 36 मूर्तियां भेजी जायेंगी विदेश

विदेशी ऑर्डर पूरा करने के लिए दिन-रात काम में जुटे हैं कुम्हारटोली के मूर्तिकार ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, संयुक्त अरब अमीरात, रूस और सिंगापुर सहित अन्य देशों से मिला है ऑर्डर कोलकाता. पश्चिम बंगाल के सबसे बड़ा पर्व दुर्गा पूजा में अभी लगभग तीन माह शेष है, लेकिन मूर्तिकारों का केंद्र कहे जाने वाले उत्तर कोलकाता के कुम्हारटोली इलाके में कारीगर विदेशी ऑर्डर को समय पर पूरा करने के लिए दिन-रात मूर्तियों को तराशने में जुटे हुए हैं. विदेशों से पूजा आयोजकों के ऑर्डर को पूरा करने के लिए अलग-अलग आकार में देवी की मूर्तियों को सावधानीपूर्वक तैयार किया जा रहा है. इस वर्ष दुर्गापूजा नौ से 13 अक्तूबर तक मनाया जायेगा. मूर्तिकार कौशिक घोष लंदन की दुर्गोत्सव समिति के लिए आठ फुट से अधिक ऊंची फाइबर ग्लास की मूर्ति बनाने में जुटे हैं और इसके लिए वह दिन-रात काम कर रहे हैं. श्री घोष ने कहा, ‘इस साल कम से कम 36 मूर्तियां ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, संयुक्त अरब अमीरात, रूस और सिंगापुर जैसे देशों में भेजी जायेंगी. इस ऑर्डर का आधा हिस्सा इसी माह समुद्र या हवाई मार्ग से भेजा जायेगा, जबकि बाकी अगस्त तक भेज दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि हम हर मूर्ति में मां दुर्गा के ‘साबेकी’ (पारंपरिक) रूप को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि, हम कुछ न कुछ खास करने की कोशिश करते हैं. उदाहरण के लिए, लंदन की पूजा में ‘एकचाला’ मूर्ति होगी.’ एक अन्य कारीगर मिंटू पाल विदेशों की 21 पूजा समितियों के लिए मूर्तियां बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि 11 मूर्तियां पहले ही अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, स्पेन, स्विटजरलैंड और दुबई जैसे देशों में भेजी जा चुकी हैं. श्री पाल ने कहा, ‘छह मूर्तियां अमेरिका भेजी गयी हैं, जहां विभिन्न प्रांतों में रहने वाले बंगाली प्रवासी इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं. इसी तरह जर्मनी और स्विटजरलैंड में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग भी दुर्गा पूजा के लिए उतने ही उत्साहित रहते हैं.’ मूर्तिकार मंटू पॉल ने बताया कि उनकी एक मूर्ति पहले ही अमेरिका के फ्लोरिडा भेज दी गयी है तथा उसी स्थान के लिए दो और मूर्तियां बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है. श्री पॉल ने कहा कि अगले हफ्ते मूर्तियां जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भेजी जायेंगी.’ उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की छोटी प्रतिमाओं के इच्छुक आयोजकों के लिए दो ‘एकचाला’ प्रतिमाएं तैयार रखी हैं, जिनमें से प्रत्येक लगभग तीन फीट ऊंची है. श्री पॉल ने कहा, ‘एक मूर्ति की कीमत लगभग 15,000 रुपये है. ये मूर्तियां बंगाली संगठनों या मित्रों के समूहों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध हैं.’ कारीगर मूर्तियों की बुकिंग प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन मंचों का भी उपयोग कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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