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दामोदर नदी पर बना अस्थायी बांस का पुल टूटकर बहा

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दामोदर नदी पर बना अस्थायी बांस का पुल टूटकर बहा

बर्नपुर. बर्नपुर के रीवर साइड में नेहरू पार्क के पीछे दामोदर नदी पर बना अस्थायी बांस का सेतु नदी की तेज धारा में बह गया. बांस के सेतु के नदी में बहने के साथ ही बांकुड़ा जिले के सालतोड़ा ब्लॉक के दर्जनों गांव के लोगों में निराशा छा गयी. पश्चिम बर्दवान जिले के प्रमुख शहर आसनसोल तथा बर्नपुर पर बांकुड़ा तथा पुरुलिया जिले के हजारों मजदूर, किसान, छात्र छात्राएं, मरीज आदि प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से निर्भर हैं. प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग नदी पार कर यहां आना जाना करते थे. पुल के ढह जाने के बाद भी लोगों का आवागमन कम नहीं होगा. लोग नाव के सहारे नदी पार करके भी आसनसोल पहुंच ही जाते हैं. नाव से नदी पार करना जोखिम भरा कार्य है. वर्षों से इलाके के लोग दामाेदर नदी के इस हिस्से पर स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं. आम जनता की बात को प्रशासन तक पहुंचाने के लिये दामोदर बिहारीनाथ सेतु बंधन कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी के पदाधिकारियों ने वर्षों तक स्थायी पुल की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखा था. लोकसभा चुनाव के कुछ दिनों पूर्व कमेटी की गतिविधियां धीमी पड़ गयीं थीं. गुरुवार को ही कमेटी के पदाधिकारी चंदन मिश्रा ने कहा था कि अगस्त के मध्य तक पुल ढह जायेगा. उसके बाद तीनों के जिलों के लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करेंगे. शुक्रवार को बांस के सेतु के बह जाने के बाद उन्होंने बताया कि अगस्त से लेकर नवंबर महीने तक बांकुड़ा तथा पुरुलिया जिले के दो दर्जन से अधिक ग्रामीण आसनसोल रोजगार, रोगियों के इलाज, शिक्षा आदि से वंचित हो जाते हैं. रोगी इलाज के अभाव में मरने को मजबूर हो जाते हैं. विद्यार्थियों की पढ़ाई बंद हो जाती है. खेतिहर मजदूर जो प्रतिदिन सब्जी बेचकर अपना गुजर बसर करते हैं, उन्हें भी भारी मुश्किल होगी. श्री मिश्रा ने बताया कि पश्चिम बर्दवान जिलाधिकारी को स्थायी पुल बनाने के निर्माण के लिए अनुरोध पत्र भेजा गया है. अब बांकुड़ा जिलाधिकारी तथा सालतोड़ा ब्लॉक अधिकारी को भी मांग पत्र दिया जायेगा. श्री मिश्रा ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष के बाद भी पश्चिम बंगाल के तीन जिलों के बीच कनेक्टिविटी का स्थायी मार्ग नहीं है. रेलमार्ग के जरिये दामोदर स्टेशन से मधुकुंडा नदी पार किया जा सकता है तथा दूसरे मार्ग से जाने के लिए 70 किलोमीटर घूमकर सड़क मार्ग से दिशरगढ़ ब्रिज पार करके आसनसोल पहुंचना पड़ता है. जबकि नदी पार करने पर यह दूरी मात्र दो किलोमीटर की है.

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