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Home पश्चिम-बंगाल सिलीगुड़ी बंगाल में अमित शाह का वादा- भाजपा सरकार बनने के 180 दिन में सुलझेगा गोरखा मुद्दा, मतदाता सूची से कटे नाम होंगे वापस

बंगाल में अमित शाह का वादा- भाजपा सरकार बनने के 180 दिन में सुलझेगा गोरखा मुद्दा, मतदाता सूची से कटे नाम होंगे वापस

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बंगाल में अमित शाह का वादा- भाजपा सरकार बनने के 180 दिन में सुलझेगा गोरखा मुद्दा, मतदाता सूची से कटे नाम होंगे वापस

Amit Shah Kurseong Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के निर्णायक मोड़ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों से मास्टरस्ट्रोक खेला है. बंगाल में पहले चरण की वोटिंग का प्रचार समाप्त होने से पहलेमंगलवार को कर्सियोंग में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने दशकों पुराने ‘गोरखा मुद्दे’ को सुलझाने की समय सीमा तय कर दी.

गोरखा की भावनाओं के साथ कोई और नहीं कर सकता न्याय

उन्होंने ऐलान किया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के मात्र 6 महीने के भीतर इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान निकाल लिया जायेगा. शाह ने कहा कि भाजपा के अलावा कोई दूसरा दल गोरखा की भावनाओं के साथ न्याय नहीं कर सकता.

गोरखा की शर्तों पर होगा समाधान

गृह मंत्री ने पहाड़ियों के लोगों की आकांक्षाओं को समझते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के बाद 180 दिनों के भीतर गोरखा मुद्दे का ऐसा हल निकलेगा, जिससे हर गोरखा के चेहरे पर मुस्कान होगी. यह समाधान उनकी अपनी शर्तों और इच्छा के अनुसार होगा, ताकि वे शांति और सम्मान के साथ रह सकें.

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ममता बनर्जी सरकार पर लगाया सहयोग न करने का आरोप

अमित शाह ने गोरखा समस्या के अब तक न सुलझने का ठीकरा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर फोड़ा. उन्होंने खुलासा किया कि गृह मंत्री के तौर पर उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए 3 बार बैठकें बुलायीं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य का एक भी प्रतिनिधि नहीं भेजा.

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कांग्रेस-टीएमसी ने गोरखा भाइयों के साथ किया अन्याय : शाह

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने हमेशा देशभक्त गोरखा भाइयों के साथ अन्याय किया है. राज्य सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त करना पड़ा.

Amit Shah Kurseong Rally: मतदाता सूची और नागरिकता पर बड़ी घोषणा

पहाड़ी क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर व्याप्त डर पर गृह मंत्री शाह ने मरहम लगाया. कहगा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन गोरखा भाइयों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये थे, भाजपा सरकार बनते ही उन सभी नामों को सम्मान के साथ वापस जोड़ा जायेगा. शाह ने गोरखाओं को देश का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी नागरिकता और पहचान पर आंच नहीं आने दी जायेगी.

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पृथक राज्य और क्षेत्रीय राजनीति का भविष्य

दार्जिलिंग, कर्सियोंग और कलिम्पोंग के पहाड़ी जिलों में पृथक राज्य (गोरखालैंड) की मांग हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है. अमित शाह के इस ‘6 महीने’ वाले वादे ने उत्तर बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है. स्थानीय राजनीतिक दल और आम नागरिक अब इस वादे को भाजपा की प्रतिबद्धता के रूप में देख रहे हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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