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माखनलाल को मिली अंतरिम जमानत, बैरंग लौट गयी उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम

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माखनलाल को मिली अंतरिम जमानत, बैरंग लौट गयी उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम

आसनसोल/दुर्गापुर.

मंगलवार को दिनभर चले हाइवोल्टेज ड्रामा के बाद आखिरकार माखनलाल मीणा को आरोपी मान रही उत्तर प्रदेश पुलिस टीम अपने साथ ले जाने में नाकाम रही. बुधवार को यूपी पुलिस ने माखनलाल को ट्रांजिट रिमांड पर साथ आगरा ले जाने के लिए दुर्गापुर अदालत में अपील की. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ट्रांजिट रिमांड की अपील खारिज कर दी और माखनलाल को सशर्त अंतरिम जमानत दे दी. शर्त यह है कि एक माह के अंदर माखनलाल को आगरा पुलिस कमिश्नरेट के शाहगंज थाना में दर्ज मामले को लेकर संबद्ध अदालत में पेश होना होगा. माखनलाल की पत्नी का दावा है कि वे लोग पिछले पांच वर्षों में कभी आगरा नहीं गये हैं. राजस्थान जाने के क्रम में आगरा स्टेशन पर कुछ सामान खरीदने उतरे थे. बस इतना ही संबंध आगरा से है. पुलिस को कोई गलतफहमी हुई है. गौरतलब है कि यूपी में आगरा पुलिस कमिश्नरेट के शाहगंज थाना की पुलिस ने मंगलवार सुबह करीब 10:00 बजे दुर्गापुर कोकओवन थाना क्षेत्र के नववारिया इलाके के निवासी व सिटीसेंटर डाकघर के कर्मचारी माखनलाल मीणा को फिल्मी अंदाज में सड़क से उठा लिया. माखनलाल अपने घर से बाइक पर ड्यूटी जा रहे थे. बाइक जैसे ही एनएच-19 के पास पहुंची, कार में सवार यूपी पुलिस की टीम ने बाइक को टक्कर मारी, जिससे माखनलाल बाइक से नीचे गिर गये. कार में सवार चार लोग उतरे और माखनलाल को पीटते हुए कार में चढ़ा कर धनबाद की ओर निकल गये. प्रत्यक्षदर्शियों ने अपहरण की सूचना पुलिस को दे दी.

पूरे एडीपीसी क्षेत्र में नाकाबंदी कर दी गयी. कार को आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के कन्यापुर पुलिस फांड़ी इलाके में जुबली के पास पकड़ लिया गया. सबको पुलिस फांड़ी लाया गया. इसके बाद पुष्टि हुई कि कार में सवार लोग अपहर्ता नहीं, बल्कि यूपी पुलिस की टीम थी, जो एक मामले के आरोपी को स्थानीय पुलिस को सूचना दिये बगैर ले जा रही थी. इसे लेकर सुबह से लेकर रात तक हाइवोल्टेज ड्रामा चला. यूपी पुलिस के उच्चाधिकारियों के भी कई बार फोन आये. राज्य के वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने भी मामले को संज्ञान में लिया. आखिर तय हुआ कि अदालत से ट्रांजिट रिमांड पर आरोपी को लेकर ही यूपी पुलिस टीम वापस जाये. बुधवार को कोर्ट में आरोपी को पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लेने की अर्जी यूपी पुलिस ने दी. अदालत ने उसे खारिज करके आरोपी को सशर्त अंतरिम जमानत दे दी.

माखनलाल को क्यों यूपी ले जाना चाहती थी पुलिस

आगरा कमिश्नरेट के शाहगंज थाना में दर्ज केस नंबर 159/24 में आइपीसी की धारा 419/420/406/506 के तहत मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है. करीब 200 ग्राम सोना ठगी का मामला है. मामले में दो आरोपियों को शाहगंज थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. सूत्रों की मानें, तो दोनों आरोपियों में से एक आरोपी माखनलाल का परिचित है, जिसने मामले में लिप्त तीसरे व्यक्ति के रूप में माखनलाल का नाम बताया है. शाहगंज थाने की पुलिस के अनुसार माखनलाल का मोबाइल फोन का टावर लोकेशन भी घटना वाले दिन इलाके में पाया गया था. उसके आधार पर ही माखनलाल को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस टीम मोबाइल फोन का टावर लोकेशन के साथ दुर्गापुर पहुंच गयी और स्थानीय पुलिस को सूचित किये बिना माखनलाल को उठा लिया. आखिरकार उन्हें निराशा हाथ लगी.

कानूनी पक्ष था मजबूत, जिसका माखनलाल को मिला लाभ

माखनलाल को अंतरिम जमानत मिलने के कानूनी पक्ष में अहम बिंदु यह है कि शाहगंज थाने में दर्ज मामले में माखनलाल नामजद अभियुक्त नहीं है और उसके खिलाफ अदालत से कोई गिरफ्तारी वारंट भी जारी नहीं हुआ है. वह डाकघर का एक कर्मचारी है. यह सारी बात माखनलाल के पक्ष में गयी. इसके चलते ही दुर्गापुर अदालत ने यूपी पुलिस की ट्रांजिट रिमांड की अपील खारिज कर उसे सशर्त अंतरिम जमानत दे दी.

मधुसूदन गराई,

वरिष्ठ अधिवक्ता

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