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बंगाल चुनाव में थर्ड जेंडर ने रचा इतिहास, दूसरे चरण में 91.28 फीसदी रिकॉर्ड मतदान, देखें आंकड़े

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बंगाल चुनाव में थर्ड जेंडर ने रचा इतिहास, दूसरे चरण में 91.28 फीसदी रिकॉर्ड मतदान, देखें आंकड़े

West Bengal Third Gender Voting West Bengal Election 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जिससे पता चलता है कि लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हुई हैं. निर्वाचन आयोग (ECI) से जारी आंकड़ों के अनुसार, बंगाल के दूसरे चरण के चुनाव में तृतीय लिंग (Third Gender) मतदाताओं ने मतदान के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. इस चरण में कुल 91.28 प्रतिशत ट्रांसजेंडर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पहले चरण के मुकाबले एक बहुत बड़ी छलांग है.

बंगाल में बढ़ा उत्साह, पहले और दूसरे चरण का अंतर

आयोग की रिपोर्ट बताती है कि बंगाल चुनाव के दोनों चरणों को मिलाकर कुल 1,257 तृतीय लिंग मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं. पहले चरण में केवल 465 ट्रांसजेंडर मतदाताओं ने मतदान किया था, जिसका प्रतिशत 56.79 रहा था. दूसरे चरण में यह संख्या बढ़कर 792 हो गयी और वोटिंग प्रतिशत 91.28 फीसदी हो गया. सामाजिक बाधाओं को पार कर इतनी बड़ी संख्या में मतदान केंद्र पहुंचना राज्य में बढ़ती राजनीतिक जागरूकता का संकेत है.

अन्य राज्यों का हाल : पुडुचेरी रहा नंबर-1

पश्चिम बंगाल ही नहीं, हालिया विधानसभा चुनावों में अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी तृतीय लिंग मतदाताओं का प्रदर्शन सराहनीय रहा.

  • पुडुचेरी में 139 तृतीय लिंग मतदाताओं में से रिकॉर्ड 91.81 प्रतिशत ने वोट डाला, जो देश में सबसे अधिक है.
  • तमिलनाडु में 23 अप्रैल को हुए मतदान में 7,728 मतदाताओं में से 60.49 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.
  • केरल में 57.04 प्रतिशत और असम में 36.84 प्रतिशत तृतीय लिंग मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लिया.

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क्यों अहम है यह भागीदारी?

निर्वाचन आयोग ने ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाये थे. बंगाल में दूसरे चरण की यह रिकॉर्ड वोटिंग दर्शाती है कि अब यह समुदाय अपनी राजनीतिक ताकत को पहचान रहा है. चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इतनी उच्च भागीदारी चुनावी नतीजों में एक ‘साइलेंट फैक्टर’ साबित हो सकती है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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