[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता ‘पलासी के गद्दार’ का नाम वोटर लिस्ट से गायब, मीर जाफर के वंशजों को क्या छोड़ना होगा बंगाल

‘पलासी के गद्दार’ का नाम वोटर लिस्ट से गायब, मीर जाफर के वंशजों को क्या छोड़ना होगा बंगाल

0
‘पलासी के गद्दार’ का नाम वोटर लिस्ट से गायब, मीर जाफर के वंशजों को क्या छोड़ना होगा बंगाल
मीर जाफर की ड्योढी

West Bengal Voter List: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 12 अप्रैल को होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने चुनाव के लिए अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दिया है. बंगाल में इस बार करीब 90 लाख ऐसे वोटरों का नाम काटा गया है जिनका नाम पिछले चुनाव में वोटर के तौर पर दर्ज था. विशेष ग्रहण पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद सबसे अधिक नाम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में कटा है. मुर्शिदाबाद के नवाब मीर जाफर के वंशजों समेत कई परिवारों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं. इसको लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारे में हलचल है. पलासी के गद्दार कहे जानेवाले मीर जाफर के वंशजों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के बाद कई बड़े सवाल भी उठने लगे हैं.

मीर जाफर के वंशज के नाम वोटर लिस्ट से कटे

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के लालबाग इलाके में बूथ संख्या 121 के अंतिम सूची में नवाबी खानदान के करीब 346 सदस्यों के नाम नहीं पाए गए हैं. इनमें 82 वर्षीय सैयद रजा अली मीर्जा जिन्हें स्थानीय लोग छोटे नवाब कहते हैं, उनके बेटे सैयद मोहम्मद फहीम मीर्जा और परिवार के दूसरे सदस्य शामिल हैं. इस परिवार का कहना है कि वह लंबे समय से वोट डालते आ रहे हैं और सुनवाई के दौरान डॉक्यूमेंट भी जमा किए. इसके बावजूद उनके नाम अंडर एडजुडिकेशन में डालकर हटा दिए गए हैं. उनका यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है, जिससे वे भी आने वाले चुनाव में वोट देने वंचित रह सकते है.

सिर्फ नवाबी परिवार नहीं, लाखों लोग प्रभावित

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 60 लाख नामों की जांच की गई थी, जिनमें से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. बाद में आपत्तियों पर विचार के बाद करीब 27 लाख नाम अंतिम सूची से बाहर रह गए. इनमें अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग शामिल है, जिनमें मजदूर, वकील, ग्रहणी और कर्मचारी शामिल है, जो पहले चुनाव में वोट डाल चुके थे. लेकिन इस बार उनका नाम लिस्ट में नहीं है. कई लोगों का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जमा किए फिर भी उनके नाम हटा दिए गए. इसके अलावा अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में नाम हटाने के पीछे तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं. जैसे नाम में बदलाव, डॉक्यूमेंट में असमानता या अन्य लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

मीर जाफर के वंशजों को क्या छोड़ना पड़ेगा बंगाल

अधिकारियों के अनुसार वोटर लिस्ट से नाम हटाने का सीधा मतलब यह नहीं है कि किसी की नागरिकता खत्म हो गई या उसे देश छोड़ना पड़ेगा. मतदाता सूची केवल मतदान के अधिकार से जुड़ी होती है. अगर किसी का नाम इसमें नहीं है, तो वह चुनाव में वोट नहीं डाल पाएगा. लेकिन उससे उसकी नागरिकता समाप्त नहीं होती है. हालांकि जिन लोगों के नाम हटे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए चुनावी ट्रिब्यूनल या संबंधित अधिकारियों के पास अपील करनी होती है. जहां वे डॉक्यूमेंट के आधार पर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. हालांकि अधिकारियों ने यह कहा कि नागरिकता को लेकर इन लोगों को अब अधिक सचेत होना होगा.

Also Read: बंगाल आ रही हैं केंद्रीय बलों की 150 और कंपनियां, चुनाव में दिखेगी अभूतपूर्व सुरक्षा

नमक हराम की ड्योढ़ी

पलासी की लड़ाई के बाद स्थानीय लोग मीर जाफ़र के महल को ‘नमक हराम की ड्योढ़ी’ के नाम से ही पुकारते हैं. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महल में सिराजुद्दौला की हत्या की गई थी. हालाँकि इस पर एक अलग राय भी है. इसके मुताबिक़ सिराजुद्दौला को क़ैदी के तौर पर गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित उनके मंसूरगंज महल में ही ले जाया गया था और वहीं मीर जाफ़र के बेटे मीरन के निर्देश पर उनकी हत्या की गई थी.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel