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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता राष्ट्रपति के ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ पर बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र को भेजी सीक्रेट रिपोर्ट, दी सफाई

राष्ट्रपति के ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ पर बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र को भेजी सीक्रेट रिपोर्ट, दी सफाई

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राष्ट्रपति के ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ पर बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र को भेजी सीक्रेट रिपोर्ट, दी सफाई

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान हुए कथित ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ (Protocol Violation) मामले में राज्य सरकार ने सीक्रेट रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है. सोमवार को राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है. इस रिपोर्ट में उन परिस्थितियों और प्रशासनिक निर्णयों का ब्योरा दिया गया है, जिसकी वजह से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शीर्ष अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे.

क्या है पूरा मामला?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मार्च को पश्चिम बंगाल सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा था. आरोप है कि राष्ट्रपति के बंगाल आगमन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुपस्थित थे. इसे ‘ब्लू बुक’ (Blue Book) के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है, जिसमें राष्ट्रपति की सुरक्षा और सम्मान के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय होते हैं.

रिपोर्ट में राज्य सरकार की दलीलें

मुख्य सचिव ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को जो सीक्रेट रिपोर्ट भेजी है, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है.

  • सीएम की अनुपस्थिति : रिपोर्ट में उन कारणों का उल्लेख किया गया है, जिनकी वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकीं.
  • कार्यक्रम स्थल का बदलाव : राष्ट्रपति के दौरे के दौरान ‘अंतरराष्ट्रीय आदिवासी और संथाल सम्मेलन’ का स्थान अचानक क्यों बदला गया, इसके पीछे के प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों के दस्तावेज भी केंद्र को सौंपे गये हैं.
  • प्रशासनिक रिकॉर्ड : राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हर चरण पर लिये गये फैसलों को रिकॉर्ड में रखा गया है और सहायक दस्तावेज भी रिपोर्ट के साथ संलग्न हैं.

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‘ब्लू बुक’ और संवैधानिक गरिमा

नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का वहां मौजूद होना प्रोटोकॉल का हिस्सा है. सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर चूक’ के तौर पर लिया है. हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि उनके निर्णय प्रशासनिक बाध्यताओं पर आधारित थे.

इतिहास के पन्ने से : प्रोटोकॉल पर कोलकाता-दिल्ली की भिड़ंत

बंगाल की राजनीति में यह पहली बार नहीं है, जब प्रोटोकॉल के मुद्दे पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विवाद खड़ा हुआ है. इससे पहले भी कई बार प्रोटोकॉल को लेकर विवाद हो चुका है, जो इस प्रकार हैं –

  • कलाईकुंडा विवाद (मई 2021) : चक्रवात ‘यास’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी देरी से पहुंची थीं और रिपोर्ट सौंपकर चली गयीं थीं. इसे केंद्र ने बड़ा प्रोटोकॉल उल्लंघन माना था.
  • मुख्य सचिव विवाद : कलाईकुंडा विवाद के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव आलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली तलब किया गया था, जिस पर राज्य और केंद्र के बीच हफ्तों तक संवैधानिक गतिरोध चला था.
  • राजभवन बनाम नबान्न : पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के कार्यकाल के दौरान भी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल को लेकर दर्जनों बार पत्राचार हुआ था.

ब्लू बुक क्या है?

यह एक अति-गोपनीय दस्तावेज है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त नियम होते हैं.

किन लोगों की उपस्थिति होती है अनिवार्य?

नियम है कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य में कदम रखते हैं, तो मुख्यमंत्री (CM), मुख्य सचिव (CS) और पुलिस महानिदेशक (DGP) का स्वागत के लिए वहां मौजूद होना अनिवार्य है.

सीटिंग अरेंजमेंट कैसे तय होता है?

आधिकारिक कार्यक्रमों में मंच पर बैठने का क्रम और सुरक्षा घेरे की जिम्मेदारी पूरी तरह इसी बुक के आधार पर तय होती है.

राष्ट्रपति से जुड़े विवाद के केंद्र में क्या है?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे पर सीएम ममता बनर्जी और शीर्ष अधिकारियों की अनुपस्थिति को केंद्र ने इसी ‘ब्लू बुक’ का उल्लंघन माना है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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