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बंगाल चुनाव: पहाड़ से समुद्र तक खिला कमल, उत्तर बंगाल में खाता भी नहीं खोल पायी तृणमूल कांग्रेस

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बंगाल चुनाव: पहाड़ से समुद्र तक खिला कमल, उत्तर बंगाल में खाता भी नहीं खोल पायी तृणमूल कांग्रेस
बंगाल विजय

West Bengal Election Result: शिव कुमार राउत, कोलकाता. विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस एक बड़े राजनीतिक झटके का सामना कर रही है. उत्तर से दक्षिण बंगाल तक राज्य के विभिन्न जिलों में भाजपा की मजबूत बढ़त देखने को मिल रही है, जबकि कई जिलों में तृणमूल कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी है. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़े राज्य में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं.

उत्तर बंगाल में तृणमूल का नहीं खुला खाता

उत्तर बंगाल में भाजपा का जबरदस्त प्रदर्शन सामने आया है. कूचबिहार की सभी नौ सीटों, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरदुआर की पांच और दार्जिलिंग की सभी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है. इसके अलावा कालिम्पोंग की सीट भी भाजपा के खाते में गयी है. इस क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से साफ होती नजर आयी है.

जंगलमहल में तृणमूल का सूपड़ा साफ

जंगलमहल क्षेत्र, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के लिए मजबूत आधार माना जाता था, वहां भी इस बार भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है. पुरुलिया की सभी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि झाड़ग्राम में भी सभी चार सीटें भाजपा के खाते में गयीं. बांकुड़ा जिले की 12 में से 11 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है. बीरभूम, जो लंबे समय से तृणमूल का गढ़ रहा है, वहां भी भाजपा ने 11 में से
सात सीटों पर जीत हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की है.

दक्षिण बंगाल में ढह गये तृणमूल के गढ़

दक्षिण बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस के कई मजबूत किले ढहते नजर आये हैं. पूर्व मेदिनीपुर में भाजपा ने सभी 16 सीटों पर जीत दर्ज की है. पश्चिम बर्दवान में सभी नौ सीटें भाजपा के खाते में गयीं, जबकि पश्चिम मेदिनीपुर में 15 में से 13 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है. इसके अलावा नदिया में 17 में से 13 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है. उत्तर 24 परगना में 33 में से 23 सीटें भाजपा के खाते में गयी हैं. हावड़ा जिले में 16 में से नौ और हुगली में 18 में से 11 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है. पूर्व बर्दवान में भी भाजपा ने 16 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की है.

इन जिलों में रही कांटे की टक्कर

कुछ जिलों में मुकाबला काफी कड़ा रहा. मालदा में 12 सीटों में से भाजपा और तृणमूल दोनों ने छह-छह सीटें हासिल की हैं. दक्षिण दिनाजपुर में भी दोनों दलों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा, जहां छह में से तीन-तीन सीटें दोनों के खाते में गयीं. वहीं, दक्षिण 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पकड़ काफी हद तक बनाये रखी है. हालांकि भाजपा यहां भी 10 सीटें जीतने में सफल रही है, जो उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. साथ ही इंडियन सेकुलर फ्रंट ने भांगड़ सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है.

दो दशकों में लगातार बढ़ा है भाजपा का वोट प्रतिशत

कोलकाता. भाजपा ने दो दशक की लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल कर ली है. भाजपा के लिए बंगाल फतह करना बड़ी चुनौती थी, इसके लिए भाजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को जान तक गंवानी पड़ी है. वर्ष 2001 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती थी और करीब पांच प्रतिशत वोट हासिल किया था. वहीं, वर्ष 2004 में हुए लाेकसभा चुनाव में भाजपा ने एक भी सीट नहीं जीती थी और उसे आठ प्रतिशत वोट मिला था. यह प्रतिशत समय के साथ लगातार बढ़ता गया है. विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट का प्रतिशत

वर्षप्रतिशत वोटसीटें
20015%0
20062%0
20114%0
201610%3
202138%77

लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट का प्रतिशत

वर्षप्रतिशत वोटसीटें
20048%0
200910%1
201417.2%2
201942.8%18
202439.1%12

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य में सत्ता विरोधी लहर और मतदाताओं के बदलते रुझान का स्पष्ट संकेत है. जिले दर जिले मिले इन नतीजों ने न केवल तृणमूल कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है, बल्कि राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना भी जता दी है.

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