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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल में 51 लाख वोटर घटे, 2021 से 36 लाख ज्यादा वोट पड़े, बंपर वोटिंग से किसका बिगड़ेगा खेल?

बंगाल में 51 लाख वोटर घटे, 2021 से 36 लाख ज्यादा वोट पड़े, बंपर वोटिंग से किसका बिगड़ेगा खेल?

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बंगाल में 51 लाख वोटर घटे, 2021 से 36 लाख ज्यादा वोट पड़े, बंपर वोटिंग से किसका बिगड़ेगा खेल?

West Bengal Election 2026 Voter Turnout: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने वोटिंग के मामले में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों और दिग्गजों को हैरान कर दिया है. चुनाव आयोग की ओर से जारी वोटर टर्नआउट रिपोर्ट के अनुसार, इस बार राज्य में रिकॉर्ड 92.95 फीसदी मतदान हुआ है.

2011 के मतदान का भी रिकॉर्ड हो गया ध्वस्त

यह आंकड़ा न केवल 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव (81.56 प्रतिशत) से कहीं ज्यादा है, बल्कि इसने 2011 के 84.33 फीसदी वोटिंग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वोटरों की कुल संख्या घटने के बावजूद पड़ने वाले वोटों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है.

कम वोटर, फिर भी बंपर वोटिंग

इस बार के चुनाव में आंकड़े कुछ ऐसी कहानी बता रहे हैं, जो पहले कभी नहीं देखी गयी. वर्ष 2021 में बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7,34,14,746 थी. वर्ष 2026 में यह घटकर 6,82,51,008 रह गयी. यानी लगभग 51.63 लाख मतदाता कम हुए. वोटर कम होने के बावजूद, 2021 की तुलना में इस बार ज्यादा वोटिंग हुई. 2021 में 5.98 करोड़ लोगों ने वोट दिया था, वर्ष 2026 में 6.34 करोड़ लोगों ने मतदान किया. यानी 36.65 लाख ज्यादा वोट पड़े हैं.

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2021 बनाम 2026 के आंकड़ों पर एक नजर

चुनाव का वर्षकुल मतदाताकुल मतदानमतदान प्रतिशत
20217,34,14,7465,98,73,76981.56
20266,82,51,0086,34,39,31292.95

West Bengal Election 2026 Voter Turnout: बंपर वोट पर सियासी घमासान, गुस्सा या नाराजगी?

इस भारी मतदान को लेकर टीएमसी और भाजपा के अपने-अपने दावे हैं. तृणमूल कांग्रेस इसे एसआईआर (SIR) के जरिये मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के खिलाफ जनता का गुस्सा बता रही है. उनका मानना है कि लोगों ने नाम कटने के डर और बदले की भावना से बढ़-चढ़कर वोट दिया है. भाजपा का मानना है कि यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन की लहर है. भाजपा इसे मौजूदा सरकार के प्रति जनता की गहरी नाराजगी का इजहार मान रही है.

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जनता ने दिखायी ताकत : विश्लेषक

चुनाव विश्लेषक हरिशंकर चट्टोपाध्याय कहते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर मतदान लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है. चुनाव में धांधली के आरोप न के बराबर हैं, जिसका मतलब है कि जनता ने स्वेच्छा से अपनी ताकत का अहसास कराया है. हालांकि, पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण में 0.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही, लेकिन ओवरऑल रिकॉर्ड ने सबको पीछे छोड़ दिया है. अब 4 मई को ही स्पष्ट होगा कि यह ‘मौन लहर’ किसे सत्ता के सिंहासन पर बैठाती है और किसे बाहर का रास्ता दिखाती है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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