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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल चुनाव में दागी और करोड़पति उम्मीदवारों की बाढ़, 129 सीटें ‘रेड अलर्ट’ सीटें, पढ़ें ADR की पूरी रिपोर्ट

बंगाल चुनाव में दागी और करोड़पति उम्मीदवारों की बाढ़, 129 सीटें ‘रेड अलर्ट’ सीटें, पढ़ें ADR की पूरी रिपोर्ट

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बंगाल चुनाव में दागी और करोड़पति उम्मीदवारों की बाढ़, 129 सीटें ‘रेड अलर्ट’ सीटें, पढ़ें ADR की पूरी रिपोर्ट

West Bengal Election 2026 ADR Report: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण में इस बार धनबल और बाहुबल का दबदबा पिछले चुनावों के मुकाबले काफी बढ़ गया है. चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की पूरी कुंडली निकाल दी है.

44 प्रतिशत विधानसभा सीटें ‘रेड अलर्ट’

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार बंगाल की 44 प्रतिशत सीटें ‘रेड अलर्ट’ सीटें हैं, जिसका मतलब है कि वहां 3 या उससे अधिक दागी उम्मीदवार आमने-सामने हैं. पिछले चुनाव (2021) की तुलना में रेड अलर्ट सीटों की संख्या में 17 प्रतिशत का भारी उछाल आया है.

भाजपा ने सबसे ‘दागी’ को दिये टिकट, 8 पर रेप का आरोप

एडीआर ने 2,920 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया है, जिसमें 683 (23 प्रतिशत) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 589 (20 प्रतिशत) पर हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप हैं. क्रिमिनल केस वाले लोगों को टिकट देने में भाजपा शीर्ष पर है. उसके 71 प्रतिशत प्रत्याशियों पर केस दर्ज हैं. टीएमसी के 39 फीसदी, माकपा के 47 फीसदी और कांग्रेस के 26 फीसदी प्रत्याशी दागी हैं.

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192 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध का केस दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, 192 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस हैं. इनमें से 8 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर बलात्कार (Rape) का आरोप है. 35 उम्मीदवारों पर हत्या और 185 पर हत्या के प्रयास के मुकदमे चल रहे हैं.

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करोड़पतियों की फौज, औसत संपत्ति में भारी इजाफा

  • करोड़पति उम्मीदवार : इस बार 629 (22 प्रतिशत) उम्मीदवार करोड़पति हैं, जो पिछले चुनाव के 18 प्रतिशत से अधिक है.
  • टीएमसी के ‘रईस’ : तृणमूल कांग्रेस के सबसे अधिक 72 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं. भाजपा के 49 फीसदी, कांग्रेस के 29 फीसदी और माकपा के 29 फीसदी प्रत्याशी करोड़पतियों की लिस्ट में हैं.
  • औसत संपत्ति : बंगाल चुनाव लड़ रहे प्रत्येक उम्मीदवार की औसत संपत्ति 1.27 करोड़ रुपए है.
  • तृणमूल ने उतारे सबसे ज्यादा करोड़पति : टीएमसी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति सबसे ज्यादा 5.39 करोड़ रुपए है. भाजपा की 2.91 करोड़ और कांग्रेस की 1.56 करोड़ रुपए है.

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West Bengal Election 2026 ADR Report: जीरो बैलेंस वाले 4 ‘शूरवीर’ और महिला भागीदारी

एक तरफ करोड़ों की संपत्ति वाले नेता हैं, तो 4 उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति शून्य (Zero) घोषित की है. इनमें मौसमी घोष (निर्दलीय), शहजादी परवीन (WPI), आसिफ हुसैन और एसके हबीब शामिल हैं. महिला उम्मीदवारों की बात करें, तो इस बार केवल 385 (13 प्रतिशत) महिलाएं मैदान में हैं, जो पिछली बार (11 प्रतिशत) से थोड़ा बेहतर है.

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शिक्षा और उम्र का गणित

  • शिक्षा : 49 प्रतिशत उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक डिग्री वाले हैं, जबकि 30 उम्मीदवार निरक्षर (अनपढ़) हैं.
  • उम्र : 54 प्रतिशत उम्मीदवारों की आयु 41 से 60 वर्ष के बीच है. 4 उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिनकी उम्र 80 साल से ज्यादा है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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