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इस बार गंगासागर मेले में पुजारियों में भी रही मायूसी

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इस बार गंगासागर मेले में पुजारियों में भी रही मायूसी

सागरद्वीप. जहां एक ओर गंगासागर मेले में दुकानदारों व व्यवसायियों का बाजार मंदा रहा. ठीक उसी तरह से इस बार पुजारियों में भी मायूसी देखी गयी. बड़ी उम्मीद लगाकर विभिन्न राज्यों से आनेवाले पुजारी निराश दिखे. पुजारियों का कहना है कि गंगासागर मेले में पुण्य स्नान को आनेवाले तीर्थयात्रियों में गोदान करनेवाले श्रद्धालुओं से नियमों के तहत विधिवत पूजा कराने के लिए दान-दक्षिणा बहुत कम मिले. कई पुजारियों ने कहा कि बुधवार को सुबह से बैठे रहे लेकिन बोहनी तक नहीं हुई. वहीं कई पुजारियों ने कहा कि इस बार निराश होना पड़ा. सागरद्वीप स्थित गंगासागर में हर साल करीब 10 हजार पंडित आते हैं. बिहार के जमुई जिले से आये विपिन पांडे ने बताया कि मंगलवार और बुधवार दो दिन उम्मीद थी कि दान-दक्षिणा अधिक मिलेगा लेकिन इस बार निराश होना पड़ा. मंगलवार को गोदान के दौरान विधिवत पूजा कराने पर कई तीर्थयात्रियों से आय हुई. लेकिन बुधवार को खाली हाथ ही बैठना पड़ा. इसी तरह से एक पुजारी शैलेंद्र पांडे ने कहा कि मंगलवार को कुछ दान-दक्षिण हाथ लग गयी लेकिन बुधवार को खाली बैठे रह गये. लोग ही नहीं हैं, सभी श्रद्धालु निकल गये है, तो कहां से दान दक्षिणा मिलेगी. पिछले साल तीन दिनों में छह हजार रुपये उन्होंने कमाये थे. लेकिन इस साल गाय-चौकी का लगने वाला किराया भी निकालना मुश्किल है. इसी तरह से बिहार के शेखपुर के निवासी पुजारी शंभु पांडे ने कहा कि वह चार दिन पहले आये थे. चार दिनों में 12 हजार रुपये की कमाई हुई है. लेकिन बुधवार को बोहनी तक नहीं हुई क्योंकि अधिकांश श्रद्धालु 14 को स्नान करके निकल गये. जबकि पिछले साल अच्छी कमाई हुई थी. वहीं बिहार के सीतामढ़ी से आये पुजारी बच्चा झा ने कहा कि ग्रुप में काफी पूजा पाठ करने वाले कई पंडित आये. सबकी स्थिति वही है. इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं होने के कारण ही उन्हें ज्यादा कमाई नहीं हो पायी. पुजारी रॉकी पांडे ने कहा कि इस साल जितनी उम्मीद थी, उतनी कमाई नहीं हुई. लेकिन ठीक है, फिर अगले साल आयेंगे. उनका 10 लोगों का ग्रुप यहां आया था.

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