[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता सलीम का दावा, सीट बंटवारे पर 18 तक होगा फैसला

सलीम का दावा, सीट बंटवारे पर 18 तक होगा फैसला

0
सलीम का दावा, सीट बंटवारे पर 18 तक होगा फैसला

कोलकाता.

वाममोर्चा की सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे पर फैसला 18 फरवरी तक फाइनल होने का दावा माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने किया है. सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए इस ओर इशारा किया कि वाममोर्चा 2021 की तरह अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में उतरेगा. इसके साथ ही उन्होंने आइएसएफ के साथ गठबंधन की बात फाइनल दौर में पहुंचने की बात कही. हालांकि उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी के लीडर हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन की बात को एक तरह से नकार दिया. पिछले दिनों हुमायूं कबीर ने, मोहम्मद सलीम से मुलाकात साथ कई बैठकें की जिसके बाद यह कयास लगाये जा रहे थे कि हुमायूं कबीर की पार्टी और लेफ्ट के साथ गठबंधन होगा और दोनों पार्टियां विधानसभा में साथ में ताल ठोकेंगी. हालांकि पार्टी और सहयोगियों द्वारा हुमायूं कबीर को लेकर विरोध के सुर उठने के बाद राज्य सचिव को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. सोमवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में सलीम ने कहा, सहयोगी पार्टियों से बात हुई है, किसी एक व्यक्ति से नहीं. आरएसपी (रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी) के साथ उनकी बातचीत चल रही है. वाममोर्चा के लिए सीटों का बंटवारा 18 तारीख तक फाइनल हो जायेगा. सीपीआइएम लिबरेशन जैसी दूसरी लेफ्ट पार्टियों के साथ भी बातचीत एक-दो दिन में फाइनल हो जायेगी. श्री सलीम ने गठबंधन को लेकर भी खुलकर बात करते हुए कहा कि आइएसएफ के साथ उनकी दो-तीन बैठकें हो चुकी हैं. उनके साथ भी बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. वह अपने वाममोर्चा के सहयोगियों के साथ 5-6 सीटों पर बात कर रहे हैं. उसके बाद ही सीटों के बंटवारे का मामला फाइनल होगा. श्री सलीम ने कहा कि पूरा राज्य वाममोर्चा चाहता है. उनके उम्मीदवारों की लिस्ट में युवा चेहरों के साथ-साथ अनुभवी चेहरे भी होंगे. सलीम भले ही फुरफुरा शरीफ के मौलवी पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ ) से चुनावी गठबंधन की बात कर रहे हों लेकिन आइएसएफ की 45 सीटों की डिमांड से पेंच फंसता नजर आ रहा है. फॉरवर्ड ब्लॉक ने चेतावनी दी है कि उसके हिस्से की सीटें आइएसएफ को दी गयीं तब वह मोर्चे से बाहर चला जायेगा. उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह आइएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने मोहम्मद सलीम के साथ एक राउंड की बैठक की थी, उन्होंने बैठक में अपनी पार्टी के लिए राज्य की 45 विधानसभा सीटों की डिमांड की है. मिली जानकारी के अनुसार वाममोर्चा के घटक दल फॉरवर्ड ब्लॉक ने 15 जबकि आरएसपी ने 20 सीटों की मांग की है जबकि राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से माकपा 200 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है. ऐसे में आरएसपी द्वारा मांगी जा रही 45 सीटों को लेकर एक बार फिर से पेंच फंसता नजर आ रहा है. माकपा को झटका, प्रतीक उर रहमान ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा िधानसभा चुनाव से पहले माकपा को संगठनात्मक स्तर पर बड़ा झटका लगा है. पार्टी के युवा नेता प्रतीक उर रहमान ने प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला किया है. उन्होंने इस संबंध में राज्य सचिव को पत्र भेजकर अपने निर्णय की जानकारी दी है. प्रतीक ने पत्र में लिखा है कि हाल के दिनों में जिला और राज्य नेतृत्व की कुछ नीतियों तथा कार्यप्रणाली से वह स्वयं को असहज महसूस कर रहे थे. विचारों के इस मतभेद के कारण मानसिक द्वंद्व की स्थिति बनी हुई थी, जिसके चलते उन्होंने प्राथमिक सदस्य पद से हटने का निर्णय लिया. प्रतीक उर रहमान का इस्तीफा माकपा के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है. चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने की चुनौती के बीच यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए नयी परीक्षा बनकर सामने आया है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel