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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता नंदीग्राम से जंगलमहल तक बिछेगा रेल पटरियों का जाल, बंगाल में 1 लाख करोड़ के 61 मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी

नंदीग्राम से जंगलमहल तक बिछेगा रेल पटरियों का जाल, बंगाल में 1 लाख करोड़ के 61 मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी

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नंदीग्राम से जंगलमहल तक बिछेगा रेल पटरियों का जाल, बंगाल में 1 लाख करोड़ के 61 मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को मां काली की प्रतिमा भेंट करते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

Suvendu Adhikari Railway Projects West Bengal: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बुनियादी ढांचे के विकास पर तेजी से काम शुरू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की बैठक में बंगाल के रेल नेटवर्क का कायाकल्प करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश का रोडमैप जारी किया गया है. मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण करने का वही फॉर्मूला अपनाने का हुक्म दिया है, जिसके तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF) को कंटीली बाड़ लगाने के लिए जमीन दी गयी थी. इसके साथ ही नंदीग्राम, जंगलमहल और सुंदरबन जैसे दुर्गम इलाकों तक रेल सेवा पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है.

टकराव खत्म, 40 एनओसी जारी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बंगाल के चीफ मिनिस्टर ने ब्यूरोक्रेसी को अपना विजन साफ करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार में राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी रहती थी. गतिरोध के कारण बंगाल में रेलवे का विकास पूरी तरह ठप हो गया था. अब इस समस्या को जड़ से खत्म किया जायेगा.

रेलवे बोर्ड का 100 फीसदी फंड तैयार

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि राज्य प्रशासन लंबित परियोजनाओं के लिए जमीन और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) उपलब्ध करा दे, तो रेलवे बोर्ड और मंत्रालय के पास बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश का फंड तुरंत मिल सकता है.

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फुटओवरब्रिज और अंडरपास के लिए 40 एनओसी जारी

रेलवे बोर्ड जमीन खरीदने के लिए पूरा पैसा देता है. कुछ मामलों में राज्य सरकार खुद जमीन खरीदकर रेलवे को सौंपेगी. इसके लिए सरकार ने कम से कम 60 परियोजनाओं के लिए भूमि देने के अलावा ‘फुट ओवरब्रिज’ और ‘अंडरपास’ के लिए 40 एनओसी पहले ही जारी कर दिये हैं.

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102 स्टेशनों का होगा आधुनिकीकरण

नबान्न सभागार में मुख्यमंत्री ने बंगाल के रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अब तक का सबसे बड़ा टारगेट सेट किया है. 2012 स्टेशनों का मेकओवर किया जायेगा और इन्हें विश्वस्तरीय बनाया जायेगा. आम जनता को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए राज्य में 538 नये फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण किया जायेगा.

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Suvendu Adhikari Railway Projects West Bengal: जंगलमहल से सुंदरबन तक 61 मेगा प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति

रेलवे बोर्ड ने पश्चिम बंगाल के लिए जिन 61 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनमें राज्य के वो इलाके शामिल हैं, जो दशकों से रेल कनेक्टिविटी के लिए तरस रहे थे. इनमें जंगलमहल, नंदीग्राम, करीमपुर, जालंगी, तेहट्टा, नदिया, मुर्शिदाबाद, लालगढ़, दक्षिण दिनाजपुर और सुंदरबन की प्रमुख रेल लाइनें शामिल हैं. इसके साथ ही कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों के लिए मेट्रो विस्तार (Metro Extension) की बड़ी परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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