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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता ममता बनर्जी को एक और झटका, सांसद सुष्मिता देव ने राज्य सभा से दिया इस्तीफा, TMC भी छोड़ी; BJP में हो सकती हैं शामिल

ममता बनर्जी को एक और झटका, सांसद सुष्मिता देव ने राज्य सभा से दिया इस्तीफा, TMC भी छोड़ी; BJP में हो सकती हैं शामिल

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ममता बनर्जी को एक और झटका, सांसद सुष्मिता देव ने राज्य सभा से दिया इस्तीफा, TMC भी छोड़ी; BJP में हो सकती हैं शामिल
हिमंता बिस्वा सरमा के साथ सुष्मिता देव. फोटो- एक्स.

Sushmita Dev Resigns TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है. हाल ही में 61 विधायकों के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आने की खबरों के बाद अब संसद में भी पार्टी को झटका लगा है. राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही वह इस सप्ताह ऐसा कदम उठाने वाली दूसरी टीएमसी सांसद बन गईं. इससे महज एक सप्ताह पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी अपना पद छोड़ दिया था. पार्टी के संगठन और संसद दोनों जगह ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.

बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया.  उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को भेजे पत्र में लिखा, ‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए.’ यानी उन्होंने अपने सांसद पद और टीएमसी पार्टी दोनों छोड़ दी है.

Sushmita Dev Meets Himanta Sarma 1 Rotated
सुष्मिता देव का इस्तीफा पत्र.

कांग्रेस से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं सुष्मिता

सुष्मिता देव 2014 में लोकसभा सांसद बनी थीं. उन्होंने असम के सिलचर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. असम कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रभावशाली बंगाली चेहरा रहे संतोष मोहन देव की बेटी सुष्मिता देव लंबे समय तक अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. सिलचर को उनके पिता संतोष मोहन देव का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है.

2021 में टीएमसी में हुई थीं शामिल

2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद 53 वर्षीय सुष्मिता देव ने 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था.  पार्टी में शामिल होने के समय उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ‘एक नए अध्याय’ की शुरुआत की बात कही थी. टीएमसी में आने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया. सूत्रों के मुताबिक, अब उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है.

बीजेपी में हो सकती हैं शामिल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की है. इसी के बाद ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं. रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि बीजेपी उन्हें असम से राज्यसभा में भेज सकती है. 

सुखेंदु शेखर ने भी दिया था इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद और पार्टी, दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. अपने बयान में उन्होंने न केवल पद छोड़ा, बल्कि पार्टी और बंगाल में उसके 15 वर्षों के शासन पर भी तीखा हमला बोला.

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बडे़ विद्रोह का सामना कर रही है टीएमसी

इन दोनों इस्तीफों से पहले पार्टी को विधानसभा के भीतर भी बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ा था. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की लाइन से अलग रुख अपनाते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर दिया था. उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी. इस घटनाक्रम ने चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर मौजूद गहरे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया. इतना ही नहीं, टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद भी ममता बनर्जी और टीएमसी को छोड़ सकते हैं. हाल ही में जब ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की मीटिंग कर रही थीं, तभी यह गुट केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मुलाकात कर रहा था. इस दौरान पश्चिम बंगाल के नए सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे. 

लगातार दो वरिष्ठ नेताओं के राज्यसभा से इस्तीफे और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में हार के केवल एक महीने और 10 दिन के भीतर ही ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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