[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता 16 से 25 वर्ष के 70% युवा नहीं ले पाते पूरी नींद

16 से 25 वर्ष के 70% युवा नहीं ले पाते पूरी नींद

0
16 से 25 वर्ष के 70% युवा नहीं ले पाते पूरी नींद

कोलकाता

. युवाओं में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. वर्ल्ड स्लीप डे से पहले ‘वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी’ की ओर से टीनएजर्स पर किये गये एक सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. यह सर्वे कोलकाता में आयोजित कलकत्ता स्लीप सोसाइटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया गया.सर्वे के अनुसार 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 70 प्रतिशत युवा पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के कारण युवाओं की नींद प्रभावित हो रही है.प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलकत्ता स्लीप सोसाइटी के सचिव डॉ सौरभ दास और अध्यक्ष डॉ उत्तम अग्रवाल मौजूद थे. उन्होंने बताया कि 16 से 25 वर्ष के युवाओं को रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है. लेकिन फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की लत के कारण युवा ठीक से सो नहीं पा रहे हैं.स्वास्थ्य पर पड़ रहा असरडॉक्टरों ने बताया कि नींद की कमी का असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे शरीर में बेचैनी बढ़ जाती है. डॉ सौरभ दास के मुताबिक, जब मेलाटोनिन का स्राव कम होता है तो शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक प्रभावित हो जाती है. इससे लोगों को सुबह काम के दौरान भी नींद आती है, उनका मूड चिड़चिड़ा रहता है और वे डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं.कम उम्र में भी बढ़ रही नींद की समस्यासर्वे में यह भी सामने आया कि 16 से 25 वर्ष के युवाओं में नींद की कमी सबसे ज्यादा है. हालांकि 10 से 12 वर्ष के बच्चों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस आयु वर्ग के लगभग 40 प्रतिशत बच्चे जरूरत से कम सो रहे हैं. अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के कारण युवा प्रतिदिन औसतन दो घंटे कम सो रहे हैं. सर्वे के अनुसार करीब 90 प्रतिशत टीनएजर सोने से एक घंटे पहले तक डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि सोने से पहले मोबाइल देखने से दिमाग उत्तेजित हो जाता है, जिससे जल्दी नींद नहीं आती. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्याप्त नींद न लेने से मानसिक चिंता (मेंटल एंग्जायटी) लगभग दोगुनी हो सकती है.कम नींद से आत्महत्या का खतरासर्वे में यह भी बताया गया कि मस्तिष्क डर और गुस्से जैसी भावनाओं को नियंत्रित करता है, जिसे दिमाग का “इमोशन अलर्ट सिस्टम” कहा जाता है. जब नींद पूरी नहीं होती, तो इस सिस्टम पर असर पड़ता है और टीनएजर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो सकते हैं. डॉ सौरभ दास के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से कम नींद लेते हैं, उनमें आत्महत्या का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग दोगुना हो जाता है. इसलिए युवाओं के लिए पर्याप्त और नियमित नींद बेहद जरूरी है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel