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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल-बिहार के फर्जी वोटरों पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, चुनाव आयोग की SIR कराने की शक्ति बरकरार, Aadhar से खुलेगी घुसपैठियों की पोल

बंगाल-बिहार के फर्जी वोटरों पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, चुनाव आयोग की SIR कराने की शक्ति बरकरार, Aadhar से खुलेगी घुसपैठियों की पोल

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बंगाल-बिहार के फर्जी वोटरों पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, चुनाव आयोग की SIR कराने की शक्ति बरकरार, Aadhar से खुलेगी घुसपैठियों की पोल

Supreme Court Verdict on SIR 2026: लोकतंत्र की शुद्धता और निष्पक्ष चुनावों की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) करने की शक्ति को सही ठहराया है.

वोटर लिस्ट की सफाई जरूरी है : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना संवैधानिक मजबूरी है. इसके लिए वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ जरूरी है. इस फैसले के बाद अब बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से लाखों संदिग्ध नाम कटने का रास्ता साफ हो गया है.

क्या है SIR और क्यों मची है खलबली?

चुनाव आयोग ने बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया था. इसके तहत आयोग ने निर्देश दिया था कि जिन मतदाताओं के नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें अपने पूर्वजों के साथ जुड़ाव (Ancestral Linkage) साबित करना होगा. इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन ‘बाहरी’ या अवैध नागरिकों की पहचान करना है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के सहारे वोटर लिस्ट में जगह बना ली है.

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क्या है विपक्ष का विरोध?

चुनाव सुधारों की बात करने वाली गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं ने इसे NRC का पिछला दरवाजा (Backdoor NRC) बताते हुए चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.

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सुप्रीम कोर्ट की 3 बड़ी बातें, जो बदल देंगी बंगाल का सियासी समीकरण

  • नागरिकता की जांच का अधिकार : कोर्ट ने माना कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता का सीमित सत्यापन करना चुनाव आयोग के संवैधानिक दायरे (अनुच्छेद 324) में आता है.
  • आधार कार्ड अंतिम सबूत नहीं : कोर्ट ने दोहराया कि आधार या साधारण वोटर कार्ड नागरिकता का निर्णायक सबूत नहीं हो सकते. अगर किसी पर संदेह है, तो आयोग उसकी जांच कर सकता है.
  • केंद्र को भेजी जाएगी सूची : कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि SIR के दौरान किसी की नागरिकता ‘संदिग्ध’ पायी जाती है और वह दस्तावेज नहीं दे पाता है, तो आयोग उसका नाम गृह मंत्रालय को भेजेगा, ताकि नागरिकता अधिनियम के तहत अंतिम फैसला लिया जा सके.

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Supreme Court Verdict on SIR 2026: बंगाल में पड़ेगा सबसे बड़ा असर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद आये इस फैसले ने चुनाव आयोग को काम करने की पूरी छूट दे दी है. बिहार में अकेले 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाये गये थे. बंगाल में भी SIR की प्रक्रिया के दौरान 60 लाख लोगों के नाम हटा दिये गये. दूसरे चरण में लाखों वोटरों के दस्तावेजों की जांच चल रही है.

मतुआ और सीमावर्ती जिलों में हलचल

उत्तर 24 परगना, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में, जहां सीएए (CAA) और नागरिकता को लेकर पहले से ही तनाव है, वहां इस फैसले के बाद सरकारी अधिकारियों (BLO) की सक्रियता बढ़ जायेगी. कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम हटाये जायें, उनकी सूची कारणों सहित सार्वजनिक की जाये, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

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अभिषेक बनर्जी और विपक्ष के लिए झटका

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य विपक्षी दल लगातार इस प्रक्रिया को गरीब और प्रवासी विरोधी बता रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट की सत्यता ही लोकतंत्र की नींव है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन राजनीतिक दलों को नुकसान हो सकता है, जो ‘वोट बैंक’ के लिए कथित रूप से संदिग्ध नागरिकों का सहारा लेते रहे हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार के लिए यह फैसला Detect, Delete and Deport नीति को कानूनी रूप से मजबूत करने वाला साबित होगा.

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