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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान

बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान

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बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान
पश्चिम बंगाल राज्य सचिवालय नबान्न.

Retired Bureaucrats Barred West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत के बाद राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में बड़े ‘शुद्धिकरण’ की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. एक बड़े घटनाक्रम में, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा विभिन्न सरकारी पदों और सलाहकार की भूमिकाओं में नियुक्त किये गये सभी रिटायर्ड नौकरशाहों (Retired Bureaucrats) को तत्काल प्रभाव से सरकारी दफ्तरों में प्रवेश करने से रोक दिया गया है.

भाजपा सरकार के शपथ से पहले सिस्टम की सफाई

मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के कार्यालय से जारी निर्देशों के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों को सील कर दिया गया है. उनकी नेमप्लेट हटा दी गयी है. भाजपा की नयी सरकार के शपथ ग्रहण से पहले इसे ‘सिस्टम की सफाई’ के तौर पर देखा जा रहा है.

सत्ता बदलते ही एक्शन में प्रशासन, क्यों लगी पाबंदी?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम नयी सरकार के गठन से पहले किसी भी तरह की फाइल मूवमेंट या डेटा से छेड़छाड़ को रोकने के लिए उठाया गया है. ममता बनर्जी के शासनकाल में दर्जनों सेवानिवृत्त IAS और IPS अधिकारियों को एक्सटेंशन देकर या सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. अब उनसे उनके सरकारी वाहन, सुरक्षा और ऑफिस चैंबर वापस ले लिये गये हैं.

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नो एंट्री का बोर्ड और फाइलों पर पहरा

कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबान्न (Nabanna) समेत अन्य प्रमुख सरकारी दफ्तरों में इन अधिकारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. सूत्रों का कहना है कि कई रिटायर अफसर जो दीदी के बेहद करीबी थे, उनके पास महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार था. अब उन फाइलों को सील कर दिया गया है.

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समानांतर प्रशासन का होगा अंत

भाजपा नेतृत्व ने चुनाव प्रचार के दौरान ही आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने रिटायर अफसरों की एक फौज खड़ी कर रखी है, जो एक समानांतर प्रशासन चला रही है. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह केवल शुरुआत है. नयी सरकार उन सभी नियुक्तियों की समीक्षा करेगी, जो नियमों को ताक पर रखकर की गयी थी.

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जवाबदेही तय होगी, युवा अफसरों को मौका मिलेगा

भाजपा नेताओं का कहना है कि जो रिटायर अफसर राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहे थे, उनके कार्यकाल के दौरान हुए फैसलों की जांच भी करायी जा सकती है. नयी प्रशासनिक नीति के तहत अब ईमानदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर वापस लाया जायेगा. युवा अफसरों को बेहतर काम करने का मौका मिलेगा.

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Retired Bureaucrats Barred West Bengal: नबन्ना में सन्नाटा, अफसरों में खलबली

ममता बनर्जी के करीबी रसूखदार सलाहकार मंगलवार को जब अपने दफ्तर पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया. सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को आधिकारिक फाइलों तक न पहुंचने दिया जाये. यह कार्रवाई उन रिटायर नौकरशाहों के लिए बड़ा संदेश है, जो पिछले 15 सालों से बंगाल की सत्ता के ‘पावर सेंटर’ बने हुए थे.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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