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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता गोदाम के बाहर बैठे लापता मजदूरों के परिजन, किसी चमत्कार की आस

गोदाम के बाहर बैठे लापता मजदूरों के परिजन, किसी चमत्कार की आस

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गोदाम के बाहर बैठे लापता मजदूरों के परिजन, किसी चमत्कार की आस

मलबे में मानव अवशेषों की तलाश जारी

पूर्व मेदिनीपुर के कई मजदूर अब भी लापता

संवाददाता, कोलकाता

पूर्व कोलकाता के आनंदपुर इलाके में दो गोदामों में लगी भीषण आग के बाद कई लोगों के लापता होने की आशंका जतायी जा रही है. सोमवार सुबह से ही लापता लोगों के परिजन जले हुए गोदाम के बाहर इस उम्मीद में बैठे हैं कि कोई चमत्कार हो जाये और उनके अपने जीवित मिल जाएं. उधर, बचावकर्मी मलबे में जले हुए मानव अंगों की तलाश में जुटे हुए हैं.

लापता लोगों में पूर्व मेदिनीपुर के शालिका धनीचक निवासी शशांक जाना का नाम भी शामिल है. शशांक पिछले आठ से 10 वर्षों से आनंदपुर में रहकर दिहाड़ी पर फूल बेचने का काम कर रहा था. वह हर दो-तीन महीने में घर जाया करता था. बेटे की बीमारी की खबर मिलने पर वह सरस्वती पूजा के दौरान घर गया था, लेकिन बकाया पैसे लेने के लिए शनिवार को दोबारा आनंदपुर लौट आया. स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार देर रात जब आग लगी, तो सबसे पहले शशांक ही जागा था और उसने दूसरों को जगाने की कोशिश की. कई लोग किसी तरह बच निकलने में सफल रहे, लेकिन शशांक अब तक लापता है. उसके भाई अमल जाना ने कहा, “मेरे बड़े भाई का अभी तक कोई पता नहीं चला है. मैं और मेरा परिवार कल से यहीं हैं. अब भी मन में किसी अलौकिक चमत्कार की थोड़ी-सी उम्मीद बाकी है.”

हालांकि शशांक का भतीजा सुशांत जाना इस हादसे में बच गया. शशांक और सुशांत रविवार रात एक ही जगह सो रहे थे. अमल के अनुसार, शशांक ने पहले अपने भतीजे को जगाया और फिर दूसरों को बुलाने चला गया. जान बचाने के लिए सुशांत ऊपर से नीचे कूद गया, जिससे उसकी पीठ में चोट आयी है. सुशांत ने परिवार को बताया कि रविवार रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच डेकोरेटर के गोदाम में अचानक आग लग गयी. तेज लपटों के साथ पूरा इलाका काले और बदबूदार धुएं से भर गया, जिससे किसी को किसी को बचाने का मौका नहीं मिला. हर कोई अपनी जान बचाने में लग गया. दावा है कि जिस कमरे में सुशांत सो रहा था, वहां कम से कम 18 लोग मौजूद थे, जो सभी पूर्व मेदिनीपुर से फूल बेचने के काम के लिए आनंदपुर आए थे. कुछ ही मिनटों में पूरा गोदाम खंडहर में तब्दील हो गया. इसी हादसे में देवादित्य डिंडा नामक एक और मजदूर भी लापता है. देवादित्य को इस साल हायर सेकेंडरी की परीक्षा देनी थी. उसके घर पर माता-पिता और एक बहन हैं. वह कुछ दिनों के लिए डेकोरेटर का काम करने आनंदपुर आया था. उसके चाचा जन्मेजय डिंडा ने बताया कि जानकारी मिली थी कि शशांक ने उनके भतीजे को भी जगाया था, लेकिन न तो शशांक और न ही देवादित्य का अब तक कोई सुराग मिल पाया है.

बताया जा रहा है कि उस रात गोदाम में मौजूद पूर्व मेदिनीपुर के ठेके पर काम करने वाले मजदूरों में से केवल तीन ही जीवित लौट पाये हैं. बाकी लोगों के नाम पर थाने में गुमशुदगी की डायरी दर्ज करायी गयी है. परिजनों का कहना है कि जिला पुलिस ने लापता लोगों के घर जाकर उनसे बातचीत की है. इसके अलावा पश्चिम मेदिनीपुर के मलिगेरिया और पिंगला इलाके के तीन अन्य लोग कृष्णेंदु धारा, अनूप प्रधान और विश्वजीत साऊ भी लापता बताये जा रहे हैं. 30 वर्षीय कृष्णेंदु की पत्नी और नौ साल का बेटा है. अनूप प्रधान की पत्नी और डेढ़ साल का बेटा हैं, जबकि 25 वर्षीय विश्वजीत अविवाहित है. तीनों कुछ दिन पहले फूलों के काम के सिलसिले में आनंदपुर आये थे. पिंगला के विधायक अजीत माइती ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा, “यह एक बेहद दर्दनाक हादसा है. हम सभी पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं.” स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदाम में कभी-कभी रात के समय भी काम चलता था. मजदूरों ने गोदाम के अंदर प्लाईवुड से अस्थायी कमरे बनाकर रहने और सोने की व्यवस्था कर रखी थी तथा वहीं खाना भी बनाते थे. आग कहां और कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है.

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