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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता चुंचुड़ा के प्रोफेसर ने पांच छात्रों के साथ मिलकर बनाया ह्यूमनॉइड रोबोट

चुंचुड़ा के प्रोफेसर ने पांच छात्रों के साथ मिलकर बनाया ह्यूमनॉइड रोबोट

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चुंचुड़ा के प्रोफेसर ने पांच छात्रों के साथ मिलकर बनाया ह्यूमनॉइड रोबोट

रोबोट बनाने में लगे पांच महीने, 60,000 रुपये की आयी लागत

मुरली चौधरी, हुगली

चुंचुड़ा नोनाडांगा के निवासी व प्रोफेसर विश्वरूप नियोगी ने कल्याणी स्थित एक निजी कॉलेज के पांच छात्रों के साथ मिलकर एक ऐसा मानव सदृश्य रोबोट बनाया है, जो हिंदी, बांग्ला व अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा में धाराप्रवाह बात कर सकता है. गिनती, पहाड़ा से लेकर सामान्य ज्ञान, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे विषयों में भी विशेषज्ञता रखता है.

प्रोफेसर नियोगी ने रोबोट बनाने में एआइ और रोबोटिक्स का इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया कि पांच महीने की कठिन मेहनत और 60,000 रुपये की लागत से इस रोबोट को तैयार किया गया है. यह ह्यूमनॉयड रोबोट न केवल विज्ञान, गणित, समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र जैसे विषयों में निपुण है, बल्कि यह अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के साथ संवाद कर उनकी भावनाओं का साथी बनने में भी सक्षम है. प्रोफेसर नियोगी का कहना है कि इस तकनीक से भविष्य में किसी व्यक्ति की आवाज और थ्रीडी छवि का उपयोग करके मृत व्यक्तियों का डिजिटल रूप तैयार किया जा सकता है. उनका मानना है कि यह तकनीक न केवल भावनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोगी हो सकती है, बल्कि स्कूल, कॉलेज और शॉपिंग मॉल जैसे स्थानों पर व्यावसायिक कार्यों में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है.

टीम ने शुरुआत में लैब में कई प्रयोग किये, जिसके बाद इस रोबोट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मोटर्स जोड़े गये. ये मोटर्स इसे न केवल हाथ-पैर हिलाने में सक्षम बनाते हैं, बल्कि यह होंठ हिलाकर इंसान जैसा बात भी करता है. इसे जो भी सिखाया जाता है, वह कुछ ही सेकंड में उसी तरह व्यवहार करता है.

हालांकि इस रोबोट को अभी व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार नहीं किया गया है. प्रोफेसर और उनकी टीम इसे बड़े पैमाने पर बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. छात्रों ने बताया कि इंसान के कामों को आसान बनाने के उद्देश्य से उन्होंने यह अनोखा रोबोट तैयार किया है. वे इस तकनीक को और विकसित कर इसे बाजार में उतारने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं. भारतीय तकनीक से निर्मित यह ह्यूमनॉयड रोबोट विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर नयी पहचान दिला सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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