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जेयू में मास कम्युनिकेशन में पीजीडी प्रोग्राम बंद

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जेयू में मास कम्युनिकेशन में पीजीडी प्रोग्राम बंद

कोलकाता. जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) ने मास कम्युनिकेशन प्रोग्राम बंद कर दिया है. इस सेल्फ-फाइनेंस्ड कोर्स के लिए कुछ ही आवेदकों ने आवेदन किया था. विभागाध्यक्ष पार्थसारथी चक्रवर्ती ने बताया कि मास कम्युनिकेशन में एक साल के डिप्लोमा में 50 सीटें थीं और बहुत कम छात्रों ने आवेदन किया था. अंतत: यूनिवर्सिटी ने अपने सेल्फ-फाइनेंस्ड मास कम्युनिकेशन प्रोग्राम को बंद करने का फैसला किया, क्योंकि छात्रों ने आवेदन ही नहीं किया, जबकि विभाग छात्रों के आवेदन दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक ले रहा था. आमतौर पर लगभग आधे उम्मीदवार ही आखिर में एडमिशन ले लेते हैं, इसलिए सीटें खाली रह जातीं हैं. जरूरी सीटों से कम सीटें भरने के कारण, जेयू के लिए प्रोग्राम चलाना मुमकिन नहीं होता. उन्होंने कहा : अगर हम ठीक से फीस नहीं संग्रह कर पायेंगे, तो यूनिवर्सिटी गेस्ट टीचरों को मानदेय कैसे देगी और इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे बनाये रखेगी. यूनिवर्सिटी में यह कोर्स 1989 में शुरू किया गया था. इस इवनिंग प्रोग्राम की कोर्स फीस 20 हजार रुपये है. विश्वविद्यालय ने इस साल अप्लाई करने वालों की आवेदन फीस वापस करने का फैसला किया है. एक स्टूडेंट ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रोग्राम को जारी रखने को लेकर पूरी तरह सीरियस नहीं थी.

यूनिवर्सिटी को एप्लीकेशन फॉर्म पहले ही जारी करना चाहिए था. स्टूडेंट ने कहा कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. एप्लीकेशन फीस वापस करना काफी नहीं है. एप्लीकेशन फॉर्म मिलने के बाद यह कहना कि प्रोग्राम बंद किया जा रहा है, यह परेशान करने वाली बात है. एडमिशन टेस्ट भी रद्द किया गया. इसे लेकर जेयू के वाइस चांसलर चिरंजीव भट्टाचार्ज ने कहा कि विभाग ने अपने बोर्ड ऑफ स्टडीज के जरिये यह फैसला लिया है. इसका मुख्य कारण यह है कि इस कोर्स को करने वालों की संख्या कम हो रही थी. सेल्फ-फाइनेंस्ड प्रोग्राम चल नहीं पाया. उन्होंने कहा कि शायद डिप्लोमा के बजाय मास्टर करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं. यूनिवर्सिटी मास कम्युनिकेशन में मास्टर प्रोग्राम चलाती है.

क्या कहना है विभागाध्यक्ष का

विभागाध्यक्ष ने कहा कि एमए प्रोग्राम में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या भी कम हो रही है, जहां पिछले साल दो टीचरों को स्क्रिप्ट का मूल्यांकन न करने के आरोप में पकड़ा गया था. एक टीचर ने कहा कि जब उन्होंने मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा शुरू किया था, तो 140 सीटें थीं. फिर धीरे-धीरे सीटों की संख्या घट कर 82 हो गयी. पिछले साल सिर्फ 52 स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया था. इस साल आधी सीटें खाली रह जायेंगी. सेल्फ-फाइनेंस्ड प्रोग्राम इस तरह नहीं चलाया जा सकता. जेयू के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार से योगदान की कमी के कारण फंड की कमी का सामना कर रहे जेयू ने एक सेल्फ-फाइनेंस्ड प्रोग्राम बंद कर दिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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