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अब विभास को इडी का समन

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अब विभास को इडी का समन

कोलकाता. राज्य में प्राथमिक स्कूलों में हुई नियुक्ति घोटाले के सिलसिले में बीरभूम जिले के नलहाटी के पूर्व तृणमूल नेता विभास अधिकारी को प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने तलब किया है. इस मामले में पहले से सीबीआइ जांच कर रही है और अंतिम चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है. इडी के समन के बाद मामले में नयी हलचल तेज हो गयी है. सूत्रों के अनुसार, अधिकारी को इसी सप्ताह कोलकाता स्थित इडी कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है. हालांकि, इस संबंध में केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. इससे पहले इडी और सीबीआइ दोनों एजेंसियां अधिकारी और उनसे जुड़े कुछ लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी हैं. सीबीआइ ने उन्हें कई बार निजाम पैलेस स्थित अपने कार्यालय में तलब कर पूछताछ की थी. गौरतलब है कि प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पद से हटाये गये पूर्व अध्यक्ष और तृणमूल विधायक माणिक भट्टाचार्य की गिरफ्तारी के बाद ही इस मामले में विभास अधिकारी का नाम सामने आया था. जांच एजेंसियों का दावा है कि अधिकारी, माणिक के करीबी माने जाते थे. वह निजी बीएड और डीएलएड कॉलेज संगठन के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं. भट्टाचार्य की गिरफ्तारी के बाद इडी ने उत्तर कोलकाता के अम्हर्स्ट स्ट्रीट स्थित एक फ्लैट में छापेमारी की थी. जांच एजेंसी का दावा था कि उस फ्लैट का संबंध अधिकारी से है. तलाशी के बाद फ्लैट को सील कर दिया गया था. अप्रैल 2023 में सीबीआइ ने बीरभूम स्थित उनके घर और आश्रम में भी छापा मारा था, जहां से कई दस्तावेज जब्त किये गये थे. अक्तूबर 2025 में सीबीआइ ने प्राथमिक स्कूलों में हुई नियुक्ति घोटाले में अंतिम चार्जशीट दाखिल की. इसमें माणिक भट्टाचार्य, विभास अधिकारी और रत्ना बागची के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया. जांच में सामने आया कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति में कथित तौर पर घुमावदार तरीके से लगभग 350 लोगों को नौकरी दी गयी थी. जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस कथित रैकेट में अधिकारी एजेंट की भूमिका निभा रहे थे. अधिकारी पर फर्जी थाना चलाने का भी आरोप लगा था. एक समय नोएडा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ब्रिटेन में कार्यालय होने तथा इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े होने का दावा कर लोगों को कथित रूप से ठगा था. जांच एजेंसियों का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर लोगों को भ्रमित किया जाता था. नियुक्ति घोटाले में पहले गिरफ्तार हुए हुगली के बलागढ़ के पूर्व तृणमूल युवा नेता कुंतल घोष ने भी सवाल उठाया था कि अधिकारी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है. इसी तरह गोपाल दलपति ने भी अधिकारी की भूमिका पर प्रश्न खड़े किये थे. फिलहाल इडी के समन के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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