शीर्ष अदालत ने राज्य के डीजीपी से हलफनामा देने को कहा
ममता बनर्जी की याचिका पर शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई
संवाददाता, एजेंसियां कोलकाता/नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक आदेश या स्पष्टीकरण जारी करेगी. पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआइआर प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. इनमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है, जिसमें एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से ‘बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाये जाने’ की आशंका जाहिर की गयी है.पीठ ने कहा: हम किसी को भी एसआइआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे. राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए. शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कुछ उपद्रवियों पर एसआइआर संबंधी नोटिस को जलाने का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस संबंध में निजी तौर पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. चुनाव आयोग ने कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा: यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है. अदालत ने एसआइआर प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की समय-सीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी की बजाय अब 21 फरवरी को प्रकाशित होने की संभावना जतायी जा रही है.प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय एसआइआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देगा. उन्होंने कहा कि जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आदेश जारी किये जायेंगे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जायेगी. सीजेआइ ने टिप्पणी की कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए.