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32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भ्रष्टाचार नहीं

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32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भ्रष्टाचार नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने किया दावा

संवाददाता, कोलकाता

राज्य में 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरियां रद्द करने के मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट की खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दावा किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ. इतना ही नहीं, वकील ने तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली द्वारा मामले में कुछ अभ्यर्थियों को तलब करके पूछताछ करने के तरीके पर भी सवाल उठाया. बुधवार को सरकारी वकील ने न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती व न्यायमूर्ति ऋतोब्रत कुमार मित्रा की खंडपीठ में कहा कि 2014 में टीइटी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुल मिला कर 70 हजार अभ्यर्थियों ने 2016, 2020 और 2022 की नियुक्ति परीक्षाओं में भाग लिया था. इनमें से, 2016 में नियुक्त इन 32 हजार अभ्यर्थियों के पास डीएलएड प्रशिक्षण नहीं था. उन्होंने बाद में प्रशिक्षण लिया. 2017 के बाद पैनल के बाहर से नियुक्त लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और यह संख्या 300 से कुछ ज्यादा हो सकती है. लेकिन 32 हजार शिक्षकों की नियुक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता. वकील ने कहा कि न्यायमूर्ति गांगुली ने पांच जिलों- हावड़ा, हुगली, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद व कूचबिहार से चुनिंदा 39 अभ्यर्थियों को बुलाया था. उन्हें यह जानने के लिए बुलाया गया था कि उन्होंने योग्यता परीक्षा दी या नहीं. 11 ने कहा कि उनकी परीक्षा समय पर नहीं हुई. बाद में ली गयी. न्यायाधीश ने कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और नदिया से भी कई अभ्यर्थियों को बुलाया, लेकिन जिन लोगों ने किसी भी जिले में साक्षात्कार दिया था, उन्हें नहीं बुलाया गया. राज्य सरकार के वकील इस तरह से चुनिंदा अभ्यर्थियों को बुलाने पर सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि जिला प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (डीपीएससी) ने इनकी नियुक्ति की थी और हर जिले में सूची अलग-अलग प्रकाशित की गयी थी, इसलिए भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं.

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