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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल चुनाव 2026 और SIR: पूछ रहा मुर्शिदाबाद के नवाब का परिवार, अब और क्या सबूत चाहिए?

बंगाल चुनाव 2026 और SIR: पूछ रहा मुर्शिदाबाद के नवाब का परिवार, अब और क्या सबूत चाहिए?

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बंगाल चुनाव 2026 और SIR: पूछ रहा मुर्शिदाबाद के नवाब का परिवार, अब और क्या सबूत चाहिए?

Murshidabad Nawab Family Voter List: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने राज्य में एक बड़ा सियासी और मानवीय संकट पैदा कर दिया है. एक चौंकाने वाली खबर मुर्शिदाबाद से आयी है, जहां कभी बंगाल की रियासत संभालने वाले नवाब परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गये हैं.

छोटे नवाब के परिवार के 80 प्रतिशत लोग नहीं रहे वोटर

‘छोटे नवाब’ सैयद रजा अली मिर्जा ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के करीब 80 प्रतिशत सदस्यों के नाम सूची से हटा दिये गये हैं. यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे बंगाल में 91 लाख से अधिक लोग इस बार वोट देने के अधिकार से वंचित रह सकते हैं.

नवाब भी हुए ‘बेगाने’: क्या मैं भारतीय नागरिक नहीं?

मुर्शिदाबाद के ऐतिहासिक नवाब परिवार के वंशजों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए पूछा है कि आखिर तमाम दस्तावेज दिखाने के बाद भी उनके नाम क्यों काटे गये. नवाब परिवार के 100 से अधिक वंशजों के नाम नयी लिस्ट में नहीं हैं.

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परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा- हमने SIR की हर प्रक्रिया का पालन किया. फिर भी हमें अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. क्या अब भी हमारी भारतीयता का कोई और सबूत चाहिए?

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मुर्शिदाबाद में डिजिटल स्ट्राइक, सीमावर्ती जिलों में हाहाकार

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR की इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा मार मुस्लिम बहुल सीमावर्ती जिलों पर पड़ी है. मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 11 लाख से अधक नामों की न्यायिक जांच हुई, जिनमें से 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटा दिये गये. मालदा में 2.39 लाख और उत्तर 24 परगना में करीब 3.25 लाख वोटरों के नाम काटे गये हैं.

वोटर के नाम काटे जाने की वजह

  • स्पेलिंग की गलती
  • उम्र में विसंगति
  • माता-पिता के नाम में अंतर

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ममता बनर्जी ने बताया ‘वोटों की चोरी’

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट में नामों की इस बड़े पैमाने पर हुई कटौती को ‘वोटों की चोरी’ करार दिया है. मुख्यमंत्री का आरोप है कि एक खास समुदाय और राजबंशी-मतुआ समुदायों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया है.

Murshidabad Nawab Family Voter List: सुप्रीम कोर्ट से राहत

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, यदि वे चुनाव से 2 दिन पहले तक ट्रिब्यूनल से क्लियरेंस ले लेते हैं, तो वे वोट डाल सकेंगे. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इतने कम समय में लाखों लोगों के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना नामुमकिन जैसा है.

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प्रवासी मजदूरों का दर्द- रोजी-रोटी कमाएं या नागरिकता बचाएं?

मुर्शिदाबाद जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाते हैं. SIR की सुनवाई के दौरान कई मजदूर घर नहीं लौट पाये, जिसके कारण उनके नाम एकतरफा तौर पर काट दिये गये. सीपीआई(एम) कार्यकर्ता मोस्तारी बानू, जिन्होंने इस मुद्दे पर अदालत का दरवाजा खटखटाया, का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी नहीं थी. इसने गरीब जनता को भारी मुसीबत में डाल दिया है.

मुर्शिदाबाद के गांवों में अब डर का माहौल है. लोग अब भी अपनी पुरानी फाइलों में दस्तावेज ढूंढ़ रहे हैं, ताकि वे साबित कर सकें कि वे इसी मिट्टी के हिस्से हैं. 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले यह मुद्दा बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा ‘फ्लैशप्वाइंट’ बन गया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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