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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता सीमा पर तनाव और घुसपैठ विवाद के बीच बांग्लादेश की मैंगो डिप्लोमेसी, शुभेंदु अधिकारी को भेजे 500 किलो आम

सीमा पर तनाव और घुसपैठ विवाद के बीच बांग्लादेश की मैंगो डिप्लोमेसी, शुभेंदु अधिकारी को भेजे 500 किलो आम

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सीमा पर तनाव और घुसपैठ विवाद के बीच बांग्लादेश की मैंगो डिप्लोमेसी, शुभेंदु अधिकारी को भेजे 500 किलो आम

Mango Diplomacy: भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में बढ़े कूटनीतिक और सीमाई तनाव के बावजूद ढाका ने अपनी मैंगो डिप्लोमेसी (Mango Diplomacy) जारी रखी है. बांग्लादेश सरकार ने एक सद्भावना संकेत (Goodwill Gesture) के रूप में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) को प्रीमियम ‘हिमसागर’, ‘हरिभांगा’ और ‘आम्रपाली’ आमों की बड़ी खेप भेजी है. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है.

500 किलो आम की खेप पहुंची कोलकाता

बांग्लादेश ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, राजनयिकों और विशिष्ट नागरिकों के लिए कुल 500 किलोग्राम आम भेजे हैं. जेसोर के बेनापोल (Benapole) सीमा मार्ग से 500 किलोग्राम आम कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप-उच्चायोग पहुंचाये गये. इस खेप में 100 किलोग्राम विशिष्ट आम मुख्यमंत्री के लिए हैं. बाकी 400 किलो आम दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों में सद्भावना उपहार के रूप में बांटे जायेंगे.

शेख हसीना के बाद भी जारी रही परंपरा

मौसमी आमों का आदान-प्रदान लंबे समय से भारत-बांग्लादेश कूटनीति का अभिन्न हिस्सा रहा है. पड़ोसी देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अक्सर भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए ‘इलिश (हिलसा) मछली’ और ‘आम’ को कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती थीं. वे इसे नियमित रूप से पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी को भेजती थीं. वर्ष 2024 में तख्तापलट के दौरान इस परंपरा में ब्रेक लगा था, लेकिन वर्तमान मोहम्मद यूनुस प्रशासन और अब नयी सरकार ने भी इस कूटनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

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शुभेंदु अधिकारी का सख्त रुख और ताजा विवाद

बांग्लादेश की इस मैंगो डिप्लोमेसी पर इस बार विशेष चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालने के बाद से ही अवैध प्रवासियों के खिलाफ बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपना रखा है. उन्होंने राज्य में ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचानो, हटाओ और निकालो) की नीति को सख्ती से लागू करने की घोषणा की है, जिससे बांग्लादेश के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर खासी कड़वाहट देखी जा रही थी.

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Mango Diplomacy: बीएसएफ-बीजीपी में हुई थी झड़प

बांग्लादेश के नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संस्थापक संयोजक नाहिद इस्लाम सहित कई राजनेताओं ने शुभेंदु अधिकारी के बयानों की तीखी आलोचना की थी. उन्होंने आरोप लगाया गया था कि बंगाल के सीएम ने बांग्लादेश को लेकर आक्रामक टिप्पणियां की थीं और अवैध घुसपैठियों को वापस धकेलने की चेतावनी दी थी. इस कड़े रुख के कारण भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच सीमा पर डिपोर्टेशन ड्राइव को लेकर झड़प और गतिरोध देखने को मिला था.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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