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किताबों के बीच विराजेंगी मां दुर्गा देंगी पुस्तकें पढ़ने का संदेश

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किताबों के बीच विराजेंगी मां दुर्गा देंगी पुस्तकें पढ़ने का संदेश

मनोरंजन सिंह, कोलकाता. भाग-दौड़ भरी जिंदगी में तकनीक ने जीवन को जितना सरल और आकर्षक बनाया है, उसी तरह दूसरी तरफ इसने हमारी कुछ खास बुनियादी आदतों को कमजोर भी किया है. इनमें से एक है पुस्तकें पढ़ने की आदत. एक समय था, जब किताबें ही ज्ञान का सबसे बड़ा और प्रमुख स्रोत मानी जाती थीं. लोग अकादमिक पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी पुस्तकों के अतिरिक्त पत्र-पत्रिकाएं, अखबार, उपन्यास नाटक आदि में खास रुचि लेते थे. चाव से पढ़ते थे. कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में भी लंबे लेख लिखे और पढ़े जा रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे सूचना तकनीक ने पांव पसारा और स्मार्टफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के रंग-बिरंगे प्लेटफॉर्म तक लोगों की पहुंच होती गयी, किताबें जीवन से दूर होती गयी हैं. किताबों की जगह ई बुक्स, शॉर्ट वीडियो, मीम्स और पॉडकास्ट ने ले ली है. पुस्तक पढ़ने की आदत खत्म होती जा रही है. पुस्तकालयों में आने वाले लोगों की तादाद मानो गिरते हुए शून्य की तरफ तेजी से बढ़ रही हो. इन सबके बीच बंगाल की राजधानी कोलकाता के पास लेकटाउन स्थित अधिवासी वृंद नामक एक संस्था ने इस बार अपने दुर्गा पूजा पंडाल को इस तरह डिजाइन करने का सोचा है, ताकि यहां आने वाले लोगों को पुस्तकें पढ़ने की फिर से प्रेरणा मिले, लोग पुस्तकों से पुन: जुड़ें. दरअसल, मामला है सोशल मीडिया के प्रभाव में मदमस्त हो रहे आम लोगों में पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाने पर बल देने का. पुस्तक प्रेम बना है| पूजा का थीम लेकटाउन के लिंक रोड इलाके में लेकटाउन अधिवासी वृंद का पूजा आयोजन 63वें वर्ष में पहुंच गया है. इंसान की जिंदगी से कटती जा रही पुस्तकों का हाल देख संस्था ने ‘पुस्तक प्रेम’ को ही अपने आयोजन के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है. पूजा कमेटी के प्रमुख देबाशीष गुहा के अनुसार, पूजा पंडाल को एक लाइब्रेरी के तौर पर ही वे लोग डेवलप कर रहे हैं. एक बातचीत में श्री गुहा ने कहा, ‘जिस तरह लोगों में पुस्तकें पढ़ने की आदत खत्म हो रही है, वह बेहद चिंता का विषय है. ऐसा लगता है मानो इसने हमारी जिंदगी में एक भयानक परिवर्तन को न्यौता दे दिया है. उस पुरानी स्थिति को फिर से बहाल करना जरूरी है. पुस्तकों के चलते इंसान में पढ़ाई के वक्त ध्यान मग्न होने की एक प्रवणता पैदा होती थी, जिससे एक व्यक्ति में धैर्य पैदा होता था. आज वह बात नहीं दिख रही. लोगों में धैर्य का भारी अभाव दिख रहा है. कहीं भी और कभी भी लोगों से बात करके देखिये. सभी हड़बड़ी में दिख रहे हैं, बेचैन और परेशान दिख रहे हैं.’ 4000 वर्ग फुट में सात महीने से चल रही तैयारी : इस पूजा पंडाल को काफी आकर्षक बनाने की कोशिश हो रही है. यहां पुस्तकों के बीच मां दुर्गा विराजने वाली हैं. इस बार यहां यही दृश्य खास होगा. मां दुर्गा की प्रतिमा उत्तर कोलकाता स्थित कुम्हारटोली में बन रही है. पिछले सात महीने से यहां पूजा की तैयारी चल रही है. पूजा पंडाल कुल चार हजार स्क्वायर फुट में बन रहा है, जिसके तैयार हो जाने पर अत्यंत भव्य, आकर्षक और प्रेरक होने का दावा किया जा रहा है. पुस्तकें 11 हजार, लागत 22 लाख श्री गुहा ने बताया कि पूजा के थीम को ठोस रूप देने के लिए पूजा पंडाल में कुल 11 हजार पुस्तकें प्रयोग की जा रही हैं. इनमें धार्मिक, आध्यात्मिक, अकादमिक और सामाजिक महत्व की पुस्तकें भी शामिल हैं. आयोजकों का कहना है कि पूजा पंडाल से पुस्तक प्रेम का संदेश देने की कीमत के रूप में उन्हें करीब 22 लाख चुकाने पड़ रहे हैं.

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